पिछले कुछ साल में कार बाजार ने तेजी से बदलाव देखा है। एक तरफ इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल जैसे जैविक ईंधन को मिलाया जा रहा है। वहीं, आने वाले समय में कारों को हाइड्रोजन जैसे क्लीन फ्यूल से भी चलाने की बाते हो रही है और भारत में टोयोटा जैसी कुछ कंपनियां इसपर काम भी शुरू कर चुकी हैं।ऐसे में पेट्रोल-डीजल से लेकर इलेक्ट्रिक, सीएनजी और हाइब्रिड विकल्पों ने आम ग्राहकों के मन में कन्फ्यूजन बढ़ा दिया है। लगातार बदलते एमिशन नॉर्म्स के चलते अब लोग इस चिंता में हैं कि भविष्य में नियमों के बदलने के कारण कहीं उनको अपनी गाड़ी छोड़नी न पड़ जाए। हाल ही में दिल्ली में पुराने वाहनों पर लगाया गया बैन इसका जीता-जागता उदाहरण है। ऐसे में आइए जानते हैं कि 10 साल के नजरिए से आपके लिए पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड में से कौन सा विकल्प फ्यूचर-प्रूफ रहेगा।पेट्रोल कारें
पेट्रोल कारें हर बजट में आसानी से उपलब्ध होती हैं और इनकी शुरूआती कीमतें डीजल या हाइब्रिड विकल्पों से कम रहती हैं। नई तकनीक जैसे टर्बोचार्ज्ड और डायरेक्ट इंजेक्शन इंजन ने इनकी माइलेज भी बढ़ाई है। पेट्रोल पंप हर जगह उपलब्ध होने से सुविधा भी ज्यादा है। हालांकि, पेट्रोल में बढ़ते एथनॉल ब्लेंडिंग से भविष्य में माइलेज कम हो सकता है। अभी भारत में E20 फ्यूल कंप्लायंट गाड़ियां आ रही हैं, जिन्हें E20 फ्यूल से चलाया जा सकता है। हालांकि, आने वाले समय में पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेडिंग को और भी बढ़ेगा जिससे पुरानी गाड़ियों की माइलेज में कमी आएगी।
डीजल कारें
डीजल कारें अपनी बेहतर माइलेज और दमदार टॉर्क के लिए जानी जाती हैं। लेकिन सख्त नियमों की वजह से, खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में, इनकी बिक्री घट गई है। जो लोग ग्रामीण या छोटे शहरों में रहते हैं या कमर्शियल इस्तेमाल के लिए गाड़ी खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह विकल्प अब भी कारगर साबित हो सकता है।
इलेक्ट्रिक वाहन
भारत में इलेक्ट्रिक कारें तेजी से पॉपुलर हो रही हैं। कम रनिंग कॉस्ट और कम मेंटेनेंस इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी घटाकर इन्हें और सस्ता किया है। लेकिन हाईवे पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और महंगी शुरूआती कीमत इसकी बड़ी चुनौतियां हैं। शहर में रोजाना चलाने वालों के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन लंबी दूरी तय करने वालों को अभी थोड़ा इंतजार करना चाहिए। चूंकि अभी सरकार का पूरा फोकस इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा दिया देने में है, इसलिए आने वाले 10-15 साल में इन्हें रिप्लेस नहीं किया जाएगा और ये फ्यूचर प्रूफ होंगे।
सीएनजी कारें
सीएनजी कारें किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बन रही हैं। पेट्रोल और डीजल की तुलना में इनकी रनिंग कॉस्ट काफी कम होती है। साथ ही, रिफ्यूलिंग स्टेशनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। हालांकि, सीएनजी कारों में बूट स्पेस कम हो जाता है और पावर भी पेट्रोल के मुकाबले थोड़ी कम होती है। फिलहाल सीएनजी कारें इतनी जल्दी आपको अलविदा नहीं कहने वाली हैं। कई शहरों में कमर्शियल वाहनों को भी सीएनजी से चलाया जा रहा है।
हाइब्रिड कारें
हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पेट्रोल और इलेक्ट्रिक का संतुलन है। ये कारें ज्यादा माइलेज देती हैं और प्रदूषण भी कम फैलाती हैं। स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें पेट्रोल मॉडल्स की तुलना में लगभग 10 kmpl तक बेहतर माइलेज देती हैं। हालांकि, इनकी शुरुआती कीमत ज्यादा होने के कारण आम खरीदार के लिए यह विकल्प अभी महंगा पड़ सकता है। ध्यान देने वाली बात ये है कि भारत में इलेक्ट्रिक कारों की तरह हाइब्रिड कारों को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। इसके पीछे की वजह इनका फ्यूल टाइप है जो अब भी पेट्रोल है। हालांकि, जबतक पेट्रोल कारें अस्तित्व में रहेंगी, हाइब्रिड कारों पर उतने सख्त एमिशन नॉर्म्स की आंच नहीं आएगी।