फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केदारबाबा का हुआ 'महाभिषेक'

Wed, 11 Sep 2013 07:29 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
लगभग तीन महीने बाद बुधवार को केदारनाथ मंदिर में रौनक लौट आई। पूजा के साथ ही मंदिर के कपाट खोल दिए गए। मंदिर में पूजा संपन्न कराने के लिए रावल मंगलवार को केदारघाटी पहुंच गए थे। केदारनाथ में बारिश लगातार जारी है। मौसम काफी खराब हो गया है, जिससे मुख्यमंत्री आधे रास्ते से ही वापस लौट गए हैं।
विज्ञापन


सुबह सात बजे केदारनाथ मंदिर में पूजा शुरू हो गई थी, जिसके बाद मंदिर के रावल भीमाशंकर की अध्यक्षता में एक घंटे तक भगवान शंकर का जल एंव मंत्रों से अभिषेक किया गया। इसके साथ ही मंदिर के शुद्घीकरण के लिए पूजा भी की गई।

पढ़ें, 'शंभू' ने चाहा, तभी चढ़ सकेंगे भक्त केदारनाथ

शुद्घिकरण के बाद सुबह 8:30 बजे आम भक्तों, वीआईपी और अधिकारियों के लिए मंदिर के कपाट खुले, हालांकि इस दौरान आम भक्त के नाम पर मौके पर स्थानीय लोग मौजूद नहीं थे। इस दौरान तीर्थ पुरोहितो ने मंदिर परिक्रमा की और गणपति पूजन, वरुण पूजन, स्वास्तिक वाचन, पूर्णावाचन, षोड़दष मंत्री पूजन, नव ग्रह पूजन, ग्राम देवता का आह्वान किया। इसके बाद तीर्थ पुरोहितों (पंथेर) और शास्त्रियों द्वारा हवन कार्य किया गया।
विज्ञापन


पढें, ...तो अब कहां से आ गए इतने शवः भट्ट

इवन के दौरान अग्नि स्थापित कर आहुतिया दीं गई और यह प्रक्रिया 12 बजे तक चली। हवन के बाद मंदिर में आरती की गई। पुरोहितों और शास्त्रियों ने उस शिला का भी पूजन किया जिससे जल प्रलय के दौरान मंदिर बचा।

उस दिव्य शिला के ऊपर फूल मालाएं चढ़ाई गई। केदारनाथ मंदिर को भी सजाया गया था। सुबह से मंदिर में लाउड स्पीकर द्वारा चल रहे भजन कीर्तन से जल प्रलय के बाद से फैला सन्नाटा टूट गया।

तस्वीरों में देखें...राजनीति के बीच केदारबाबा का 'महाभिषेक'

पूजा में शामिल पुरोहित - श्रीनिवास पोस्ती, आचार्य पंकज शास्त्री, संजय तिवारी
मंदिर पहुंचे वीआईपी - मंत्री हरक सिंह रावत, बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, उपाध्यक्ष मधु भट्ट, विधायक शैला रानी
मंदिर पहुंचे अधिकारी - रुद्रप्रयाग के डीएम, एसपी, एसएसपी, सीएमओ रुद्रप्रयाग डा. कलधर शर्मा
दून से गए डॉक्टर - कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश सुंद्रीयाल, सर्जन डॉ. ज्योति बोहरा सहित पांच डॉक्टर

साफ सफाई
केवल मुख्य द्वार, गर्भ गृह और दोनों बरामदों की सफाई की गई थी। लेकिन इसके अलावा चारों ओर सिर्फ मलबा फैला हुआ था। इतना ही नहीं मीडियाकर्मियों की नजर से छुपाने के लिए टैंट से मलबे को ढक दिया गया था।

तीर्थ पुरोहितों ने मलबे पर चढ़कर ही मंदिर की परिक्रमा पूरी की। इतने दिनों में सिर्फ मंदिर आने-जाने वाले मुख्य मार्ग को ही काम चलाऊ ठीक किया गया है।

ये हो गए नष्ट
बाबा केदारनाथ मंदिर के अलावा और कोई मंदिर सुरक्षित नहीं है। उनके स्थान पर बस मलबा है। यहां तक की भवनाशेष भी नजर नहीं आ रहे हैं। आदिशंकराचार्य के समाधि स्थल, इनेश्वर महादेव, सत्यनारायण मंदिर व दुर्गा माता मंदिर भी कहीं नजर नहीं आए। इतना ही नहीं जिस हंस कुंड में पितृ तर्पण किया जाता है अब वो भी नहीं है। इसके अलावा अमृत कुंड, उदांत कुंड भी नष्ट हो गया है। भारत सेवा आश्रम, बिडला हाउस समेत कई गेस्ट हाउस नष्ट हो चुके हैं।

दो धाराओं के बीच मंदिर
जल प्रलय से पूर्व जहां मंदाकिनी मंदिर के बाएं हिस्से में बह रही थी अब वो दो धाराओं में बंट गई है। जिस कारण मंदिर दोनों धाराओं के बीच में आ गया है। मंदिर से करीब 50 किमी दूर मंदाकिनी दो हिस्सों में बटी है। एक धारा मंदिर के दाएं से गुजर रही है दूसरी बाएं से। दाई धारा में ही एसडीएम बह गए थे। हालांकि, मधु गंगा शांत है लेकिन क्षीर गंगा पहले जैसी ही है।
विज्ञापन


इस पूजा को कपाट खुलना नहीं कहेंगे। इसे पुनर्बहाली पूजा कहेंगे। क्योंकि पहले से हो रही पूजा बाधित हो गई थी उसे शुरू किया गया।
- गणेश गोदियाल, बदरी केदार समिति के अध्यक्ष

फेसबुक पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें