आपदा ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। जो कल तक ठाठ से रहते थे, आज बेघर हैं। दूसरों को आश्रय देने वाले खुद ठौर ढूंढ रहे हैं। मुनस्यारी के उमरगड़ा, भदेली के लोगों के लिए पुनर्वास ही एकमात्र विकल्प है।
गोरी ने भदेली में मदकोट सड़क का नामोनिशान मिटा दिया है। ग्राम पंचायत सिलिंग के तोक उमरगड़ा में 16 मकानों में दरार आ गई है। गोरी के कटाव से गांव के लोगों की सैकड़ों नाली जमीन बह गई है।
टेंटों में रह रहे हैं ग्रामीण्ा
आपदा प्रभावित मदकोट सड़क के किनारे टेंटों में रह रहे हैं। प्रधान द्रौपदी देवी का कहना है कि उनका गांव अब रहने लायक नहीं रह गया है। मदकोट रोड के किनारे स्थित भदेली में गोरी के कहर से तीन मकान ध्वस्त हो गए हैं। दो मकान खतरे में हैं। ग्रामीणों की 300 नाली जमीन गोरी में बह गई है। नौ मकानों वाला भदेली आज वीरान हो गया है।
अगर कुछ बचा है तो गोरी की दिल दहला देने वाली रफ्तार और जमीन को तहसनहस करता नजारा। आपदा प्रभावितों का कहना है कि सरकार से एक महीना बीतने के बाद भी कोई ठोस मदद नहीं मिली है। पिथौरागढ़ जिले में दशकों से आपदा प्रभावितों का पुनर्वास नहीं किया जा रहा है। इसको देख लोग चिंतित हैं।
क्या कहतें हैं विधायकः
'आपदा प्रभावितों का हरहाल में पुनर्वास किया जाएगा। इसके लिए सरकार से लगातार संपर्क किया जा रहा है। जल्द ही प्रभावितों के लिए जमीन का चयन हो जाएगा।'
हरीश धामी विधायक धारचूला