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घंटी बजती तो बचती जान

Tue, 02 Jul 2013 10:11 PM IST
गंगा असनोड़ा थपलियाल
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उत्तराखंड के आबादी क्षेत्रों में मानकों के विरूद्ध लगे रेडिएशन के कारक मोबाइल टावर इस राज्य पर आई इस त्रासदी में काम नहीं आ सके। विभिन्न कंपनियों के मोबाइल टावर विद्युत व्यवस्था बाधित होने की दशा में काम नहीं कर पाए।
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सूत्रों की मानें तो मोबाइल टावरों के जेनरेटर के लिए मिलने वाला डीजल मोबाइल टावर तक पहुंचते-पहुंचते एक तिहाई भी नहीं रह पाता। जिससे ऐन मौके पर डीजल उपलब्ध न होने से मोबाइल टावर काम नहीं कर पाते।

यदि मोबाइल काम करते, तो शायद घायल अपनी स्थिति घरवालों को बता सकते थे और कई घायलों को बचाना भी संभव हो सकता था। विशेषकर भूख-प्यास से जंगलों में दम तोड़ने वाले हजारों लोगों की जानें तो बचाई ही जा सकती थी।
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खस्ताहाल है पहाड में मोबाइल सेवा
उत्तराखंड के गांव-गांव तक मोबाइल सेवाएं पहुंचाने में बीएसएनएल का बड़ा हाथ है। बीएसएनएल के साथ प्रतियोगिता की दौड़ में उतरे अनेक कंपनियों ने भी गांव-गांव तक मोबाइल टावर लगाए हैं। अकेले केदारनाथ क्षेत्र की बात की जाए, तो जग्गी बागवान, फाटा तथा त्रिजुगीनारायण में बीएसएनएल के साथ ही एयरटेल, वोडाफोन तथा आइडिया के भी मोबाइल टावर हैं।

इसी तरह बदरीनाथ में भी इन कंपनियों के मोबाइल टावर उपलब्ध हैं, लेकिन बदरीनाथ में बीएसएनएल की सेवा को छोड़ कहीं भी ये मोबाइल टावर काम नहीं आ पाए।

बेच खाते हैं डीजल
सूत्रों की मानें, तो यात्रा सीजन शुरू होते ही मोबाइल टावरों को विद्युत व्यवस्था बाधित होने की दशा में डीजल से चलाने के लिए डीजल मिलता है, लेकिन इस डीजल में से एक तिहाई मात्रा भी मोबाइल टावर संचालक तक नहीं पहुंच पाती।

टावर संचालकों ने नाम न छापने की शर्त पर यह बताया है, कि यदि कंपनी 400 लीटर डीजल एक माह के लिए आवंटित करती है, तो हमारे पास 50-60 लीटर भी नहीं पहुंच पाता है।

अकेले रूद्रप्रयाग जिले में बीएसएनएल के हैं 20 टावर
अकेले रूद्रप्रयाग जिले में बीएसएनएल के ही 20 मोबाइल टावर हैं। जगह-जगह सड़कें टूट जाने से ओएफसी कट गई। यदि सेटेलाइट व्यवस्था होती, तो मोबाइल सेवा बाधित न होती।

बदरीनाथ में सेटेलाइट व्यवस्था होने से वहां फंसे यात्रियों तथा उनके परिजनों को बीएसएनएल की सेवा का लाभ मिल पाया। अन्य कंपनियों के टावरों को बदरीनाथ में सेना ने किसी तरह डीजल पहुंचाकर दो-दो घंटे के लिए बहाल कराया।

'हमारा केदारनाथ का टावर तथा एक्सचेंज इस त्रासदी में तबाह हो गया है। ओएफसी कट जाने से हम सेवाएं बहाल नहीं कर पाए, लेकिन गौरीकुंड स्थित सेटेलाइट टावर की सेवाओं का लाभ बीएसएनएल उपभोक्ताओं को बराबर मिलता रहा।'
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एके मित्तल, महाप्रबंधक बीएसएनएल

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