फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

100 साल में वेंटिलेटर पर पहुंच गया वीआईपी अस्पताल

Fri, 15 Apr 2016 02:03 PM IST
शूरवीर सिंह भंडारी/ अमर उजाला, मसूरी

सार

  •  मसूरी में आज की अपेक्षा पिछली सदी में बेहतर थीं स्वास्थ्य सुविधाएं
  • 1903-04 में हुआ था सेंटमेरी अस्पताल का निर्माण, टीबी के इलाज के लिए देशभर में था मशहूर
  • 1917 में बने सिविल अस्पताल में थी इमरजेंसी, ऑपरेशन  समेत तमाम जरूरी सुविधाएं 
  • 2009 में अस्पताल को संयुक्त चिकित्सालय बनाने के लिए तोड़ दिया गया
  • सात साल बाद अभी तक पूरा नहीं हो पाया संयुक्त चिकित्सालय का निर्माण कार्य
विज्ञापन
तमाम चिकित्सा सुविधा से सजा-धजा सेंटमेरी इनडोर हास्टिपल अब खस्ताहाल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विश्व विख्यात पर्यटन नगरी में 100 साल पुराने दो अस्पताल वेंटिलेटर पर चले गए। इन अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं आज की अपेक्षा पिछली सदी में ज्यादा बेहतर थीं। ब्रिटिश शासन काल में बने सेंट मेरी और सिविल अस्पताल में आजादी के वर्षों बाद तक व्यवस्थाएं दुरुस्त रहीं, लेकिन महकमे की उदासीनता के कारण अब दोनों अस्पतालों में स्टाफ और सुविधाओं का टोटा है। 
विज्ञापन


1917 में बने सिविल अस्पताल (तत्कालिक न्यू डिस्पेंसरी इन मसूरी) को 2009 में संयुक्त चिकित्सालय बनाने के लिए तोड़ दिया गया। इसके स्थान पर करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से 51 बेड का अस्पताल बनकर तैयार किया जाना था। लेकिन, सात साल बीत जाने के बाद भवन निर्माण तक पूरा नहीं हो सका। 

टीबी के ईलाज को देशभर में मशहूर था अस्पताल
वहीं 1903-04 में बने सेंट मेरी अस्पताल का भवन भी जर्जर हो चुका है। अस्पताल इन दिनों चिकित्सकों और सहयोगी स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा है। जबकि, अस्पताल अपने निर्माण काल से आजादी के कई वर्षों बाद तक सेनीटोरियम यानी टीबी के ईलाज के लिए देशभर में मशहूर था। 
विज्ञापन


एक सदी पहले इन अस्पतालों में एक्सरे-मशीन, इलैक्ट्रिक्स लाइट बाथस, रेडियोथैरेपी, हाईड्रोथैरपी समेत अन्य चिकित्सीय सुविधाएं मौजूद थी, लेकिन अब हालात यह है कि इनमें ओपीडी तक बेहतर ढंग से संचालित नहीं होती।

मसूरी में मौजूदा समय में दो सरकारी अस्पताल हैं। यहां सैलानियों की आमद के साथ ही स्थायी जनसंख्या और जौनपुर प्रखंड के हजारों मरीज इन दो अस्पताल के भरोसे हैं। लेकिन, दोनों ही अस्पताल चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। राजकीय सेंटमेरी अस्पताल मे बेड है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है। 

चिकित्सकों के छह पद खाली 
सिविल अस्पताल में वर्तमान चिकित्सा अधीक्षक समेत चिकित्सकों के छह पद हैं। जिनमें दो ही कार्यरत है। पैरा मेडिकल स्टाफ में एक फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स के पांच पदों से एक ही तैनात है। तीन का अटैचमेंट चल रहा है। 

कमोवेश यही स्थित सेंटमेरी अस्पताल की भी है। सेंटमेरी में अधीक्षक समेत छह पद हैं। जिनमें दो ही कार्यरत है। यहां पर भी पैैरा मेडिकल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भारी कमी है।  
विज्ञापन

पिछले सात साल से अधर में लटका है निर्माण, बिगड़े जा रहे अस्पताल के हालात

पिछले सात साल से अधर में लटका है संयुक्त चिकित्सालय मसूरी का निर्माण - फोटो : amar ujala
आजादी से पूर्व सेंटमेरी और सिविल अस्पताल की सेवाएं मौजूदा समय से कई गुना बेहतर थीं। आजादी के बाद इनकी जो गुणवत्ता प्रभावित हुई, वह अलग राज्य बनने के बाद दोबारा ठीक होने उम्मीद थी। लेकिन, उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद दोनों अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं तेजी से क्षीण होने लगीं। इनमें चिकित्सक और सहयोगी स्टाफ की कमी के साथ ही दवाओं का भी टोटा रहने लगा।

2009 में हुई सुधार की कवायद
संयुक्त चिकित्सालय बनाने की दिशा में 2009 में एक ठोस पहल की गई। नगर वासियों और सैलानियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से 2009 में सिविल अस्पताल में संयुक्त चिकित्सालय निर्माण के लिए तीन करोड़ 50 लाख रुपये का शासनादेश किया गया। 

20 विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं से युक्त अस्पताल की परिकल्पना की गई थी। उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को निर्माण का जिम्मा देने के बाद बिल्डिंग का काम शुरू किया गया। इसके लिए डेढ़ करोड़ रुपये रिलीज भी हुए, लेकिन निर्माण निगम ने आधा-अधूरा ढ़ांचा तैयार कर काम छोड़ दिया। 

निगम ने छह करोड़ 50 लाख का प्रस्ताव किया शासन को प्रेषित 
बताया जा रहा है कि निगम ने छह करोड़ 50 लाख रुपये अतिरिक्त का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया है। 26 जनवरी 2015 को इसका उद्घाटन होना था, लेकिन अब तक बाहरी ढांचे का निर्माण ही पूरा नहीं हो पाया है। सिविल अस्पताल को तोड़ने के बाद मरीजों को आवासीय भवनों में देखा जा रहा है। 

पिछले कई सालों से आपरेशन थियेटर, प्रसूति रूम समेत जरूरी सुविधाएं न होने से एक भी आपरेशन नही हुआ। चिकित्सकों को मरीज देखने के लिए पर्याप्त जगह न होने से कई बार मरीजों को दिक्कतें आती हैं। नए अस्पताल के निर्माण के बाद ये समस्याएं हल हो जाएंगी। 
-डॉ. संदीप टंडन, अधीक्षक, सिविल अस्पताल 

सेंटमेरी अस्पताल में इमरजेंसी रूम में एक बेड है। किसी भी दुर्घटना पर एक से अधिक घायल का इलाज संभव नहीं हो पाता। स्टाफ की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
-डॉ. विनोद नौटियाल, सीएमएस सेंट मेरी हॉस्पिटल 

संयुक्त चिकित्सालय के निर्माण का मामला शासन में लंबित है। निर्माण एजेंसी ने साढ़े छह करोड़ रुपये का आंगणन भेजा है। 
-डॉ. एसपी अग्रवाल, सीएमओ 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें