उत्तराखंड के चमोली जिले की उर्गम घाटी में आपदा के चार माह बाद भी सुविधाएं बहाल नहीं हो पाई हैं। घाटी में पैदल पुलिया, आम रास्ते, पेयजल योजनाएं और मोटर मार्ग अब भी क्षतिग्रस्त हैं।
उर्गम घाटी के देवग्राम, बड़गिंडा, उर्गम, ल्यारी, सलना, गीरा, बांसा, भर्की, पिलखी, अरोसी और भेंटा गांवों के ग्रामीण पैदल आवाजाही कर रहे हैं। हेलंग-उर्गम मोटर मार्ग कई जगहों पर क्षतिग्रस्त है।
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ग्रामीण डर के साए में मजबूर
ऐसे में घाटी के लिए वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। क्षेत्र में इन दिनों जंगली भालू, सुअर और गुलदार का आतंक बना हुआ है। मजबूर ग्रामीण डर के साए में अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए पैदल ही आवागमन कर रहे हैं।
वहीं, उर्गम घाटी के समीप ही आपदा प्रभावित क्षेत्र डुमक, कलगोठ, पल्ला जखोला और किमाणा गांवों के ग्रामीण भी क्षतिग्रस्त पैदल रास्तों से ही आवागमन कर रहे हैं।
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केस-एक
16/17 जून को हेलंग-उर्गम मोटर मार्ग कई जगहों पर अवरुद्ध हो गया था। जो अभी तक भी ठीक नहीं हो पाया है। 21 अक्तूबर को उर्गम गांव से अपने भाई की शादी में घाट ब्लॉक के सेंती गांव जा रही विजया देवी अपने दो बच्चों को लेकर 8 किमी पैदल चलकर हेलंग पहुंची। विजया का कहना है कि शासन-प्रशासन ने घाटी की ओर से मुंह फेर दिया है।
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केस-दो
देवग्राम के राजेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि कल्प गंगा के बहाव से गांव के पैदल पुलिया और आम रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे, जो अब तक दुरुस्त नहीं हुए हैं। डीएम ने मनरेगा के तहत गांवों में पैदल रास्तों को सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक विकास खंड से इस ओर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।