उत्तरकाशी के मनेरी भाली पावर प्रोजेक्ट में चार चांद लगाने के नाम पर यूपी सरकार ने एलआईसी से 420 करोड़ का लोन लेकर डकार लिया है। लोन के पैसे से एक रुपये भी इस पावर प्रोजेक्ट पर नहीं लगाया गया।
अब केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय उत्तराखंड सरकार पर दबाव बना रहा है कि 352 करोड़ का भुगतान करे, बाकी पैसा यूपी देगा।
केंद्र और यूपी का दबाव झेल रही उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। वाद दायर करने की सारी तैयारी पूरी हो गई है।
मनेरी भाली पावर प्रोजेक्ट (फेज-टू) के लिए 1998-99 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत निगम ने एलआईसी से लोन लिया था। प्रदेश के बंटवारे के पहले ही यूपी सरकार ने इस लोन की रकम को दाएं-बाएं खर्च कर डाली।
इस धन को लेकर कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। साल 2000 में उत्तराखंड यूपी से अलग हो गया। तब तक यह मामला दबा रहा।
रिकॉर्ड के मुताबिक केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने साल 2005 में अचानक 352 करोड़ की देनदारी उत्तराखंड सरकार पर ठोंक दी। इसी बीच कैग ने इस धनराशि को लेकर अपनी रिपोर्ट भी दे दी।
रिपोर्ट में बताया गया कि लोन की रकम पावर प्रोजेक्ट के बजाए पुराने कर्ज चुकाने, कर्मचारियों का वेतन देने और दूसरे मदों में खर्च कर दी गई। उत्तराखंड सरकार के एतराज जताने पर अधिकारियों की बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया।
इस मामले के सतह पर न आने से राजनीतिक गलियारों में उतना हो-हल्ला तो नहीं मचा, लेकिन अंदरखाने फाइलें तेजी से घूमने लगीं।
उच्च पदस्थ विभागीय अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड, यूपी और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के कई प्रतिनिधियों की कई राउंड बैठक हुई, लेकिन एकतरफा उत्तराखंड पर ही दबाव बनाया जाता रहा।
वर्ष 2010 में ही सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने की सारी तैयारी पूरी कर ली थी। चार सीनियर अधिवक्ताओं की टीम बनी है और जुलाई में वाद दायर कर दिया जाएगा।
इस संबंध में प्रमुख सचिव ऊर्जा सुखवीर सिंह संधू ने सुप्रीम कोर्ट जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि हमारे पास इस बाबत सारे सबूत हैं।