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ट्राली से नदी आरपार करने को मजबूर

Wed, 23 Mar 2016 09:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
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ट्रॉली - फोटो : amarujala
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चामकोट गांव सड़क से नहीं जुड़ने से ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पैदल रास्ता भी अगस्त 2012 में भागीरथी की बाढ़ में तबाह हो गया था। तब से ग्रामीण गंगा भागीरथी पर लगी करीब डेढ़ सौ मीटर लंबी जर्जर ट्राली के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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दिलसौड़ ग्राम पंचायत के चामकोट गांव में करीब सौ परिवार निवास करते हैं। जिला मुख्यालय से महज सात किमी दूर होने के बावजूद यह गांव विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ है। वर्षों पूर्व देवीधार से अठाली-चामकोट-दिलसौड़-मनेरा होते हुए जिला मुख्यालय तक सड़क स्वीकृत हुई थी।

सड़क कटान का काम भी हुआ, लेकिन रास्ते में जगह-जगह भूस्खलन के चलते यह सड़क ठंडे बस्ते में चली गई। गांव के लोग दिलसौड़, मनेरा होते हुए पैदल आवाजाही करते थे, लेकिन यह रास्ता भी अगस्त 2012 की बाढ़ में तबाह हो गया। तब आवाजाही के लिए भागीरथी पर एक ट्राली लगा गंगोत्री हाईवे से जोड़कर प्रशासन ने गांव को भुला दिया।
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साढ़े तीन साल बीतने पर स्थिति यह है कि जर्जर हाल में पहुंची ट्राली हादसों को न्योता दे रही है। प्रशासन ने दो आदमी ट्राली की रस्सी खींचकर ग्रामीणों को नदी पार कराने की व्यवस्था की थी, पर मौके पर कोई मौजूद नहीं रहता। ऐसे में मातली एवं उत्तरकाशी के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

बस एक पुल बनवा दे सरकार
चामकोट गांव निवासी मंजू देवी, कमली देवी, दुर्गी देवी, उर्मिला, पुष्पा, महेंद्री, अनुसूया, राजेंद्र चमोली, जयकिशन चमोली आदि का कहना है कि एक ट्राली लगाकर सरकार ने गांव को भुला दिया। नौ-नौ हजार रुपये मानदेय पर ट्राली के रस्से खींचने के लिए तैनात श्रमिक नदारद रहते हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए नदी पार कमरे किराए पर लेकर रहना पड़ रहा है, जिससे गांव में खेतीबाड़ी चौपट हो रही है।

चामकोट गांव के लिए पुल का प्रस्ताव शासन को भेजा है। ट्राली को शीघ्र दुरुस्त कराया जाएगा। ट्राली की रस्सी खींचने के लिए तैनात श्रमिक यदि लापरवाही बरत रहे हैं, तो इस पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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अशोक कुमार, ईई, लोनिवि प्रांतीय खंड उत्तरकाशी।
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