मोरी ब्लॉक के आराकोट क्षेत्र के आपदा पीड़ित नौ ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने आंदोलन का निर्णय लिया है। टिकोची में आयोजित बंगाण संघर्ष समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि किसी भी व्यक्ति को चुनावी लाभ के उद्देश्य से क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा और क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति यदि किसी भी पार्टी या राजनेता का साथ देते हुए क्षेत्र में किसी भी प्रकार की चुनावी गतिविधियों में भाग लेता है, तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
आराकोट क्षेत्र के आपदा पीड़ित गत दो वर्षों से क्षेत्र की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। आपदा पीड़ितों का कहना है कि आपदा को आए हुए दो वर्ष से अधिक का समय हो गया है, लेकिन क्षेत्र में कोई भी कार्य नहीं किया गया। मोटर मार्ग, पुल, सिंचाई नहर एवं पेयजल योजना की स्थिति वैसे ही बनी हुई है, जैसे आपदा के समय थी। क्षेत्र के लिंक मार्ग तक नहीं खोले गए हैं। आपदा से सैकड़ों सेब बाग तहस-नहस हो गए थे, लेकिन आपदा पीड़ितों को राहत राशि के नाम पर एक-एक हजार के चेक देकर इतिश्री कर ली गई। पात्र लोगों का सही मूल्यांकन तक नहीं किया गया। क्षेत्र के लोग आपदा से प्रभावित मोटर मार्ग, सिंचाई नहर, पेयजल योजनाओं का निर्माण करने के साथ ही आपदा पीड़ितों को कृषि भूमि हेतु सरकारी पट्टे पर जमीन देने, काश्तकारों का केसीसी ऋण माफ करने एवं उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
इसको लेकर बंगाण संघर्ष समिति के पदाधिकारी कई बार जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं। कोई भी कार्रवाई न होने पर आपदा की बरसी पर दो बार काला दिवस मनाने के साथ ही कई बार धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। रविवार को टिकोची में बंगाण संघर्ष समिति के बैनर तले किराणू, दुचाणू, चिंवा, गोकुल, माकुड़ी, डगोली, झोटाणी, बरनाली आदि गांव के ग्रामीणों की बैठक में विधानसभा चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया गया। बैठक का प्रस्ताव राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य चुनाव आयुक्त एवं जिलाधिकारी को प्रेषित किया गया है। इस अवसर पर बंगाण संघर्ष समिति के संरक्षक मनमोहन चौहान, अध्यक्ष राजेंद्र नौटियाल, विनोद रावत, जितेंद्र चौहान, मोहन लाल रावत आदि मौजूद थे।