उत्तरकाशी। जिले में काशी विश्वनाथ, कंडार देवता आदि तमाम मंदिरों के द्वार भी भक्तों के लिए बंद रहे। शाम पांच बजे प्रशासन की ओर से सायरन बजाया गया। इसके साथ ही लोगों ने अपने घरों के आगे खड़े होकर ताली, थाली, शंख, घंटी आदि बजाकर आपदा के इस दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर आवश्यक सेवाओं को अंजाम दे रहे पुलिस, स्वास्थ्य, सफाई आदि से जुड़े कर्मचारियों का आभार जताया।
गोपेश्वर/कर्णप्रयाग/गैरसैंण। चमोली जिला मुख्यालय सहित जोशीमठ, पोखरी, पीपलकोटी, नंदप्रयाग, चमोली, कर्णप्रयाग, आदिबदरी, गैरसैंण और घाट बाजार में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला। बंद के दौरान नगर पालिका, नगर पंचायत और जल संस्थान के कर्मियों ने कीटनाशक और पानी का छिड़काव किया।
नई टिहरी। नई टिहरी, बौराड़ी, चंबा, धनोल्टी, थत्यूड़, नैनबाग, नरेंद्रनगर, आगराखाल गजा, खाड़ी, घनसाली, चमियाला, प्रतापनगर, लंबगांव, कंडीसौड़, कमंाद में सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान स्व-स्फूर्त बंद रहे। सड़कों, गली-मोहल्लों और दूर-दराज गांवों में भी पूरी से सन्नाटा पसरा रहा। बंद के दौरान सिर्फ मेडिकल स्टोर ही खुले रहे। डीएम डा. वी षणमुगम स्थिति का जायजा लेने के लिए कंट्रोल रूम में डटे रहे। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस कर्मियों से हर क्षेत्र की अपडेट लेते रहे।
पौड़ी। पौड़ी शहर में कोटद्वार रोड, माल रोड, बस अड्डा, श्रीनगर रोड, धारा रोड, अपर बाजार, लोअर बाजार में दुकानें पूरी तरह बंद रही। वाहनों की आवाजाही भी पूरी तरह ठप रही। शहर में लोग अपने-अपने घरों में ही रहे। एडीएम डा. एसके बरनवाल ने बताया कि जनता कर्फ्यू में लोगों का सहयोग सराहनीय रहा है।
रुद्रप्रयाग। जिला मुख्यालय के साथ-साथ तिलवाडा, मयाली, जखोली, अगस्त्यमुनि, चंद्रापुरी, भीरी, ऊखीमठ, गुप्तकाशी व फाटा के अलावा केदारघाटी, तल्लानागपुर और ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे स्थित व अन्य स्थानों पर सभी बाजार पूरी तरह से बंद रहे। जनपद के अधिकांश मुख्य बाजारों में समय-समय पर पुलिस की गश्त भी जारी रही।
श्रीनगर। श्रीनगर, श्रीकोट, बागवान, देवप्रयाग, कीर्तिनगर समेत अन्य बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। श्रीनगर में सुबह-सुबह कुछ दुकानें खुली थी, जो बाद में बंद हो गई। जनता कर्फ्यू के दौरान मेडिकल स्टोर भी बंद रहे। ऐसा उत्तराखंड आंदोलन के दौरान भी दिखा था, लेकिन तब पुलिस-प्रशासन के खौफ से बंद था। इस बार प्रधानमंत्री के आह्वान पर कोरोना को हराने के लिए सब घरों में डटे रहे। पुलिस बैरियरों पर पुलिस का सख्त पहरा दिखा।
बस से पहुंचे लोग भटके
श्रीनगर। सुबह-सुबह उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों से दिल्ली व चंडीगढ़ से पहुंचे यात्री बहुत परेशान रहे। उनको यहां से आगे जाने के लिए वाहन नहीं मिले। यात्री वाहनों के लिए भटकते रहे। बंगलूरू से अपने घर कर्णप्रयाग लौट रहे अभिषेक ने बताया कि वह चार दिन पूर्व बंगलूरू से चले थे। दिल्ली में एक दिन उन्हें बस नहीं मिली। शनिवार रात की बस से वह यहां आए, लेकिन अब आगे जाने के वाहन नहीं मिलने से फंस गए हैं।
देवाल बाजार 24 मार्च तक रहेगा बंद
देवाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर देवाल में जनता कर्फ्यू का जबरदस्त असर देखने को मिला। रविवार को पूरे दिन सड़कों पर एक भी वाहन नहीं चले और बाजार भी बंद रहे। देवाल, लोहाजंग, नंदकेशरी, मुंदोली, वांण, ल्वाणी, बोरागाड़, सवाड़ आदि सभी छोटे-बड़े बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। व्यापार संघ के अध्यक्ष केडी मिश्रा ने कहा कि प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल द्वारा बाजार को अगले 48 घंटे तक बंद रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के कारण देवाल बाजार अगले दो दिन 24 मार्च तक बंद रहेगा।
जीप, टैक्सी, बस और रेल सेवाएं भी ठप
कोटद्वार/लैंसडौन/सतपुली/बैजरो/धुमाकोट। उत्तराखंड परिवहन निगम, जीएमओयू, गढ़वाल जीप टैक्सी समिति, सिद्धबली ऑटो एसोसिएशन, उत्तराखंड ई रिक्शा समिति ने वाहनों का संचालन बंद रखा, जिससे रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और टैक्सी स्टैंड में भी सन्नाटा पसरा रहा। जनता कर्फ्यू को सफल बनाने के लिए पुलिस प्रशासन की टीमें मुस्तैद रही। लैंसडौन में सेना के अलकनंदा शॉपिंग केंद्र में शनिवार व रविवार लगातार दोनों दिन एहतियात के तौर पर दुकानदारों ने दुकानें बंद रखी। बीरोंखाल के अंतर्गत व्यापारियों ने रसिया महादेव, मैठाणाघाट, बीरोंखाल, बैजरो, बेदीखाल में और धुमाकोट क्षेत्र के जड़ाऊंखांद, अदालीखाल, नैनीडांडा क्षेत्र में बाजार बंद रहे।
यमकेश्वर/दुगड्डा। पौखाल, भृगुखाल, कांडी और यमकेश्वर में अपने प्रतिष्ठानों और दुकानों को बंद रखा। दुगड्डा में पालिका क्षेत्र के सभी वार्डों में व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
रुद्रप्रयाग। जिला मुख्यालय के साथ-साथ तिलवाडा, मयाली, जखोली, अगस्त्यमुनि, चंद्रापुरी, भीरी, ऊखीमठ, गुप्तकाशी व फाटा के अलावा केदारघाटी, तल्लानागपुर और ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे स्थित व अन्य स्थानों पर सभी बाजार पूरी तरह से बंद रहे।