छात्रसंघ पदाधिकारियों ने डीएम को दिए पत्र में की हस्तक्षेप करने की मांग
उत्तरकाशी। पीजी कॉलेज के छात्रसंघ ने छात्र-छात्राओं की ओर जमा शुल्क का छात्रहितों में प्रयोग न होने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वित्तीय नियमावली 2022 में बदलने के कारण छात्रों के शुल्क की आधी धनराशि वापस शासन को जा रही है। इस संबंध में छात्रसंघ ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर छात्रहित की धनराशि को खर्च करवाने की मांग की है।
छात्रसंघ अध्यक्ष विनय मोहन चौहान, आयूष बिष्ट, शुभम चमोली और सभासद अमेरिकन पुरी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है। उनका कहना है कि वर्ष 2020 में बनी वित्तीय नियमावली में यह कहा गया था कि छात्र-छात्राओं की ओर से जमा शुल्क को उनके हित और संसाधन बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाए। इसमें छात्रों के पुस्तकालय, फर्नीचर, लैब उपकरण सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना था।
दो वर्ष तक यह व्यवस्था सुचारू चली लेकिन वर्ष 2022 में इस नियमावली में परिवर्तन किया गया। उसमें कहा गया कि अगर कॉलेज में जमा शुल्क का वित्तीय वर्ष में खर्च नहीं कर पाए तो उसका 50 प्रतिशत वापस शासन को भेजा जाएगा। छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इस नियमावली के लागू होने के बाद लगभग एक करोड़ से अधिक की धनराशि वापस शासन को चली गई है।
इस संबंध में यह भी परेशानी हो रही है कि अब शुल्क पोर्टल के माध्यम से जमा होती है। वहां से भी कॉलेज को धनराशि आने में देरी हो रही है। इसलिए छात्रों का दिया गया शुल्क ही उनके हित में खर्च नहीं हो पा रहा है। इसलिए छात्रसंघ के लोगों ने डीएम से इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री से भी वार्ता करने की मांग की है।