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जयकारों के साथ बाबा बौखनाग देवता के मंदिर के कपाट खुले

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रवाईं घाटी के आराध्य बाबा बौखनाग देवता के मंदिर के कपाट सोमवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। आज अपराह्न जयकारों के साथ बाबा बौखनाग अपने मूल स्थान कफनौल गांव स्थित मंदिर से विधि विधान के साथ लोगों के दर्शनार्थ बाहर निकले। इस दौरान देवता के पश्वा संजय डिमरी ने भक्तों को आशीर्वाद दिया।
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सोमवार को मंदिर से बाहर निकलने के बाद बौखनाग की पालकी ने ढोल बाजों के साथ भाटिया गांव के लिए प्रस्थान किया। भाटिया गांव में तीन दिन का प्रवास करने के बाद पालगी कंसेरु, चक्र, उपराडी, पौल गांव, साड़ा, कृष्णा, कुण्ड आदि गांव में रात्रि प्रवास करेगी और इन गांवों में हर्षोल्लास के साथ मेलों का आयोजन किया जाएगा। डेढ़ सप्ताह तक चलने वाली मेलों की यह शृंखला कुण्ड गांव में समाप्त होगी और उसके बाद बाबा बौखनाग की पालगी भाटिया में विश्राम करेगी। सावन के महीने भंडारे के साथ बाबा बौखनाग कंसेरु गांव में बने मंदिर के गर्भगृह में एक वर्ष के लिए विराजमान हो जाएंगे। कपाट खुलने के अवसर पर समिति के अध्यक्ष जयेंद्र रावत, प्रधान भाटिया प्रथम गीता डिमरी, प्रधान कफनौल शेखर पंवार, श्याम डोभाल, अजय पाल, वीरेंद्र पंवार आदि मौजूद रहे।
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