ग्रामीण व जनप्रतिनिधि इस बार निर्णायक लड़ाई लड़ने की बना रहे हैं रणनीति
पुरोला। रवांई घाटी में लंबे समय से चली आ रही प्रस्तावित पृथक जनपद पुरोला की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्र में बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है और ग्रामीणों से लेकर जनप्रतिनिधि तक इस बार निर्णायक लड़ाई लड़ने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
दो दिन बागवानी विकास परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार की ओर से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पृथक जिला पुरोला की मांग को दोबारा उठाया गया है। उन्होंने स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर क्षेत्र के लोगों को लामबंद होने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर पृथक जनपद की औपचारिक घोषणा की मांग करेगा।
दूसरी ओर क्षेत्र के ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य भी बीडीसी बैठकों में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने पर मंथन कर रहे हैं और अब बड़े आंदोलन पर गहन मंथन शुरू हो चुका है। वर्तमान उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय की भौगोलिक दूरी और कठिन पहाड़ी परिस्थितियों के कारण रवांई घाटी के लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
8016 वर्ग किमी के विशाल क्षेत्र में फैले जिले के आराकोट, लिवाड़ी, फिताड़ी, ओसला जैसे सुदूरवर्ती गांवों से लोगों को साधारण कार्यों के लिए भी 250–300 किमी की यात्रा कर उत्तरकाशी पहुंचना पड़ता है। इसी उपेक्षा और असुविधा ने पिछले चार दशकों से क्षेत्रवासियों को पृथक जनपद के लिए संघर्ष करने को मजबूर किया है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने वर्ष 2014–15 में यमुना घाटी पृथक जनपद की घोषणा की थी लेकिन मुख्यालय निर्धारण पर उपजे विवाद के कारण मामला आज तक अधर में लटका है।