गंगोत्री धाम से हिमालय की जैव विविधता एवं गंगा की सहायक धाराओं के संरक्षण के मिशन की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर गंगा को विश्व धरोहर घोषित करने का भी संकल्प लिया गया।
बृहस्पतिवार को भागीरथी (गंगा) के उद्गम स्थल गोमुख के पास गंगोत्री धाम में गंगा को विश्व विरासत घोषित करने का संकल्प लिया गया। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि वैश्विक अमूल्य धरोहर व निर्मल पावन जल की स्रोत व करोड़ों लोगों की आस्था की प्रतीक जीवनदायिनी मां गंगा भारतीय संस्कृति की ध्वज वाहक है। शहरीकरण व आबादी बढ़ने से गंगा नदी पर बुरा प्रभाव पड़ा है। नदी के कई हिस्से बेहद प्रदूषित हो चुके हैं। गंगा संरक्षण का अभिप्राय हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक संपूर्ण जैव विविधता संरक्षण जरूरी है। ईश्यावाश्यम आश्रम गंगोत्री धाम के परमाध्यक्ष स्वामी राममूर्ति महाराज ने कहा कि वे भाग्यशाली हैँ कि 35 वर्षों से गंगोत्री में गंगा मां के आंचल में साधना कर रहे हैं। गंगा संरक्षण के लिए जो प्रयास किये जा रहे हैं, सराहनीय हैं। लेकिन वे अपर्याप्त हैं। अच्छा रहेगा कि गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक नित्य गंगा जल का वैज्ञानिक परीक्षण कराकर प्रदूषण के कारणों का पता लगाकर उनपर प्रतिबंध लगाया जाए। शिक्षक डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल ने कहा कि मिशन के द्वारा नदियों के तटों पर रहने वाले लोगों, स्कूल व कालेजों में अध्ययनरत छात्रों को रचनात्मक व्यावहारिक जानकारियों व प्रदर्शनियों द्वारा जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर तीर्थ पुरोहित सहित ज्ञानचंद पंवार, सुदीप सिंह रावत, राजेश सेमवाल, सुनील सेमवाल, जगरोशन सिंह आदि मौजूद थे।