लंबे समय से बंद पड़ी पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना।
- फोटो : UTTER KASHI
लघु जल विद्युत निगम की सवा दो मेगावाट की पिलंगगाड़ जल विद्युत परियोजना सरकार के उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के दावों की पोल खोल रही है। वर्ष 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त हुई यह परियोजना लागत से ज्यादा मरम्मत पर खर्च करने के बावजूद अभी तक ठीक नहीं हो पाई है। अब तक इस परियोजना से 15 करोड़ रुपये से ज्यादा की उत्पादन हानि हो चुकी है।
वर्ष 2004 में 8.90 करोड़ रुपये लागत से बनकर तैयार हुई सवा दो मेगावाट की पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना सालाना 12 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन के लिए डिजाइन है। नौ सालों तक अपनी लागत से ज्यादा विद्युत उत्पादन कर चुकी यह परियोजना जल विद्युत निगम की कमाऊ परियोजना में शुमार थी। जून 2013 की आपदा में इस परियोजना के हेड, डिसिल्टिंग चैंबर और पावर चैनल को आंशिक क्षति पहुंची। तब परियोजना लागत से ज्यादा 12 करोड़ रुपये स्वीकृत कर मरम्मत कार्य शुरू किए गए, जो जून 2016 तक पूरे होने थे, लेकिन लेटलतीफी के चलते अप्रैल 2018 में यह परियोजना दोबारा शुरू हो पाई।
आधे अधूरे मरम्मत कार्य के चलते परियोजना बीते जुलाई माह में फिर ठप हो गई। लघु जल विद्युत निगम की इस इकलौती महज सवा दो मेगावाट की परियोजना मेें लागत से ज्यादा मरम्मत पर खर्च और इससे कहीं ज्यादा उत्पादन हानि के बावजूद परियोजना ठप होने से निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। जबकि जिले में वर्ष 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त हुई निजी क्षेत्र की 8 मेगावाट की गंगनाणी लघु जल विद्युत परियोजना को आपदा के महज आठ माह बाद ही दुरुस्त कर उत्पादन शुरू कर दिया गया था।
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पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना में आपदा के बाद हुए पुनर्निर्माण कार्य पूरे कराकर राज्य के मुख्यमंत्री से इसका उद्घाटन कराने की योजना है। इसके लिए नवंबर माह तक टरबाइनों की मरम्मत और अधूरे सिविल कार्य पूरे करने का लक्ष्य है। - नवल किशोर चौधरी, ईई पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना