डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तरकाशी ने इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) को बिना फार्मासिस्टों को विश्वास में लिए लागू करने का विरोध किया है। इस संबंध में सीएमओ और सीएमएस को सौंपे ज्ञापन में फार्मासिस्ट संवर्ग को खत्म करने का आरोप लगाया गया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष रतनमणी नौटियाल व सचिव विजयपुरी ने ज्ञापन में कहा कि केंद्र के निर्देश पर राज्य सरकार ने इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड को स्वास्थ्य विभाग में लागू करने का निर्णय लिया है, जिसको सरकार मूल स्वरूप में ही लागू करने जा रही है। जबकि राज्य विषम भौगोलिक परिस्थितियां केंद्र की चिकित्सा इकाई से अलग हैं। कहा कि आईपीएचएस के लागू होने से सबसे बड़ा नुकसान फार्मासिस्ट संवर्ग को होगा। उन्होंने इसे फार्मेसिस्ट संवर्ग को खत्म करने की साजिश बताया। कहा कि उत्तरकाशी जैसे कम जनसंख्या वाले जिले में जहां फार्मासिस्ट के कुल 74 पदों में से 32 पद आईपीएचएस लागू होने से समाप्त हो जाएंगे। जिला अस्पताल में भी दस के सापेक्ष 5 ही पद शेष रह जाएंगे। उन्होंने फार्मासिस्टों के वीआईपी ड्यूटी, चारधाम, विभिन्न मेलों, स्वास्थ्य शिविर, कुंभ मेला, कोविड वैक्सीनेशन, सैंपलिंग, कोविड औषधि वितरण, कोविड केयर सेंटरों में रोगियों की स्क्रीनिंग आदि में महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उनके लिए पदों का सृजन करने की मांग की। साथ ही उपकेंद्रों को अपग्रेड कर खोले गए हेल्थ वेलनेस सेंटरों में अप्रशिक्षितों की ओर से कार्य करने पर सवाल उठाए गए। कहा कि मामले में प्रांतीय कार्यकारिणी जो भी निर्णय लेगी, जिला कार्यकारिणी उसी निर्णय को अपना पूर्ण समर्थन देगी।