नगर को तीर्थनगरी घोषित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। यात्रा सीजन में भी नगर में धड़ल्ले से मांस-मदिरा की बिक्री और गंगा किनारे चल रहे बूचड़खानों की गंदगी गंगा में बहाए जाने से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। शनिवार को तमाम धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने एकजुट होकर जिला मुख्यालय पर जनाक्रोश रैली निकाली। उन्होंने एक माह के भीतर उत्तरकाशी को तीर्थ नगरी घोषित नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
शनिवार को विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग जिला मुख्यालय पर एकत्र हुए। उन्होंने नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए जनाक्रोश रैली निकाली। जुलूस कलेक्ट्रेट पहुंच कर आम सभा में तब्दील हो गया। यहां हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम का प्रमुख पड़ाव होने के साथ ही उत्तरकाशी काशी विश्वनाथ सहित अनेक पौराणिक मंदिरों का शहर है।
गंगा किनारे स्थित इस शहर की पहचान धार्मिक नगरी के तौर पर है। इसके बावजूद यहां धड़ल्ले से न सिर्फ मांस, मछली, अंडे, मदिरा का प्रचलन हो रहा है, बल्कि गंगा किनारे बूचड़खाने चल रहे हैं।
जिनकी गंदगी गंगा में ही बहाई जा रही है। रैली में चार धाम विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष सूरतराम नौटियाल, पूर्व विधायक गोपाल रावत, पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा, प्रमुख भटवाड़ी चंदन पंवार, रामसुंदर नौटियाल, घनानंद नौटियाल, लोकेंद्र बिष्ट, विजय बहादुर रावत, प्रताप पोखरियाल, विष्णुपाल रावत, पुष्पा चौहान, हरीश डंगवाल, किशोर भट्ट, स्वामी कृष्णानंद, जयवीर चौहान, गिरीश रमोला, बालशेखर नौटियाल आदि भाजपा, कांग्रेस, उक्रांद, व्यापार मंडल, गायत्री परिवार, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी, विहिप आदि तमाम संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे।