गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में रसचक्र साहित्य परिषद की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। बीते रोज पालिका सभागार में आयोजित काव्य गोष्ठी में वेद प्रकाश ने सरस्वती वंदना तथा नागदत्त ने गंगा की महिमा प्रस्तुत की। कवि केशव पुरी ने अपनी रचना के माध्यम से पहाड़ और दिल्ली का अंतर बताया। विजय पंवार ने हास्य कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
गोष्ठी में शामिल एडीएम अशोक पांडेय ने सृूर्य की लालिमा की रश्मियां पुकारती कविता पेश कर अपने काव्य कौशल का परिचय दिया।
गजेंद्र मटूड़ा ने इन नांग्या बणू की व्यथा, मुकेश तलवाड़ ने देश हमारा है, बहती जहां गंगा की धारा है, जय हरि श्रीवास्तव ने नहीं चलेगा, नहीं चला है, देश सियासी इन हथकंडों से, माधव शास्त्री ने धरती मां छ भट्याणी सुन, बांके बिहारी ने क्या पूछता है मेरा पता, उमेश बहुगुणा ने संघर्षों में जीना सीखो, सुख में सार नहीं मिलता, मौहम्मद आसिफ अंसारी ने जश्ने मणतंत्र मनाने के लिए आए हैं आदि कविताओं के माध्यम से खूब वाहवाही बटोरी।
इनके अलावा जशोदा, डा. मीना नेगी, पदम दत्त पैन्यूली, डा. यशोदा प्रसाद सेमल्टी, विजय बलूनी, नागेंद्र थपलियाल, प्रताप सिंह बिष्ट आदि ने भी कवितापाठ किया।
समापन पर रसचक्र साहित्य परिषद के अध्यक्ष डा. रामचंद्र उनियाल ने माघ मेले में आयोजित कवि सम्मेलन में शामिल हुए कवियों को प्रशस्तिपत्र एवं पारितोषिक वितरित किया।