दो वर्ष बाद हो रहे माघ मेले पर एक बार फिर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। प्रदेश में बढ़ रहे ओमिक्रॉन के मामलों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने ऐतिहात बरतने के निर्देश दिए हैं। वहीं माघ मेला आयोजक जिला पंचायत का कहना है कि मेले का आयोजन शासन के दिशा निर्देशों के तहत ही किया जाएगा।
कोरोना संक्रमण काल के चलते बीते दो वर्षों से उत्तरकाशी के पौराणिक व ऐतिहासिक माघ मेले का आयोजन नहीं हो पाया था। इस बार जिला पंचायत प्रशासन ने माघ मेले के आयोजन का निर्णय लिया था, जिसके लिए जिला पंचायत ने जिला प्रशासन, पुलिस व नगर पालिका प्रशासन के साथ बैठक आयोजित कर मेले की रूपरेखा भी तैयार की थी। मेले का आयोजन रामलीला मैदान में 14 से 22 जनवरी तक किया जाना है। लेकिन एक बार फिर प्रदेश में ओमिक्रॉन की धमक से सरकार ने ऐतिहात बरतने शुुरू कर दिए हैं। सरकार ने ऐतिहात के तौर पर रात्रि कर्फ्यू भी लगा दिया है। इसके अलावा अन्य समारोहों में भी लोगों की संख्या निर्धारित की गई है। ओमिक्रॉन के मामलों में बढ़ोत्तरी पर और अधिक ऐतिहात बरते जाने की संभावना जताई जा रही है। जिससे माघ मेले के आयोजन पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण का कहना है कि मेले के आयोजन की तैयारियां चल रही है। मेले का आयोजन शासन की गाइड लाइन के तहत ही किया जाएगा।