जोशियाड़ा एवं विकास भवन क्षेत्र के लोगों को सरकारी लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
क्षेत्रों को जोड़ने लिए एक साल पहले शुरू हुए जोशियाड़ा झूला पुल का काम धीमी गति से चल रहा है। पुल का अभी तक एक एबटमेंट (पुल के आधार) भी तैयार नहीं हो पाए हैं।
ऐसे में ग्रामीणों को ज्ञानसू या केदारघाट झूला पुल से एक-दो किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
वर्ष 1989 में 75.10 लाख से तैयार हुआ जोशियाड़ा झूला पुल अगस्त 2012 की बाढ़ की भेंट चढ़ गया था, जिससे जोशियाड़ा के साथ आसपास के गांव अलग-थलग पड़ गए थे। अप्रैल 2014 में बाढ़ में बहे झूला पुल के स्थान पर नए पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
करीब सात करोड़ रुपये से बनने वाले झूला पुल के निर्माण का जिम्मा एनबीसीसी कंपनी को सौंपा गया था, लेकिन काम धीमी गति से चल रहा है। एक साल में अभी तक पुल का एक एबटमेंट भी तैयार नहीं हो पाया।
शासन से झूला पुल की डीपीआर स्वीकृति नहीं मिलने से काम धीमी गति से चल रहा है। अब डीपीआर स्वीकृत हो चुकी है। पुल के दोनों छोर से काम शुरू कर इसी साल दिसंबर तक पुल तैयार कर दिया जाएगा।
नवल किशोर, परियोजना प्रबंधक एनबीसीसी।
वास्तव में पुल का काम धीमी से चल रहा है। एनबीसीसी को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। पुल के एक छोर पर हुए अतिक्रमण से भी दिक्कत आ रही थी। अतिक्रमण हटाने के लिए बात हो चुकी है।
हरगिरी, एसडीएम भटवाड़ी।