फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लिवाड़ीवासी 14 किमी चलने को मजबूर

विज्ञापन
विज्ञापन
विकासखंड मोरी के सीमांत गांव लिवाड़ी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। ग्रामीण सड़क मार्ग तक पहुंचने के लिए 14 किमी का पैदल सफर करते हैं। लकड़ी के सिलीपर रखकर गाड़ गदेरे पार किए जा रहे हैं।
विज्ञापन

लिवाड़ी गांव आज भी सड़क सहित कई अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। तीन हजार आबादी का यह गांव आज भी सड़क से 14 किमी दूूर है। मोटर मार्ग से इतनी दूर होने के कारण किसी के चोटिल होने या गंभीर बीमार होने पर उक्त व्यक्ति को डंडी-कंडी के सहारे अस्पताल तक पहुंचाते हैं। कई बार तो चोटिल व्यक्ति या मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
क्षेत्र के लिवाड़ी, फिताड़ी, रेकचा, कासला व हरिपुर गांव को सड़क से जोड़ने के लिए जखोल लिवाड़ी 20 किमी मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था। वर्ष 2013 में पीएमजीएसवाई ने मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन अभी तक कार्य पूरा नही हुआ है। पीएमजीएसवाई ने प्रथम फेज में 15 किमी कासला तक ही कटिंग का कार्य किया है। पांच किमी आगे लिवाड़ी गांव को छोड़ दिया है। सड़क निर्माण कार्य पूर्ण किए जाने के लिए लिवाड़ी के ग्रामीण कई बार विकासखंड मुख्यालय मोरी में धरना-प्रदर्शन सहित चक्काजाम तक कर चुके हैं।
विज्ञापन

- गांव में दूध, सब्जी और फलों का खूब उत्पादन होता है, लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने से इन्हें बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। ग्रामीणों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। -दिनेश रावत, ग्रामीण युवा।
- मैं पिछले 30 वर्षों से गांव की महिलाओं को बुनाई का काम सिखा रही हूं, लेकिन जब तक गांव में सड़क नहीं होगी तब तक हमारी मेहनत का कोई फायदा नहीं होगा। हम अपने बनाए कपड़ों को बाजार तक नहीं ले जा पा रहे हैं। -लऊंगा देवी, ग्रामीण महिला।
- जखोल लिवाड़ी मोटर मार्ग की कटिंग का कार्य कासला तक तो कर दिया गया है, लेकिन मोटर मार्ग के बुरे हाल हैं। बरसात के समय यह सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं रहती है। -सत्यवान रावत, युवा ग्रामीण।
- ठेकेदार व विभाग की लापरवाही से सड़क निर्माण में विलंब हुआ है। विभाग व ठेकेदार को छह माह के भीतर कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए हैं। - दुर्गेश्वर लाल, विधायक पुरोला।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें