नकोड़ा कपोला गांव की एक महिला ने स्वास्थ्य व सड़क सुविधा के अभाव में दम तोड़ दिया। घरेलूू कार्य करते हुए चोटिल महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़कोट ले जाया जाना था, लेकिन गांव से सात किमी दूर मुख्य सड़क तक पहुंचने में ही महिला की जान चली गई।
रविवार को नकोड़ा कपोला गांव निवासी बिजेंद्री देवी चानक घरेलू काम करते हुए चोटिल हो गई, जिसके बाद परिजन महिला को बड़कोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाना था, लेकिन गांव से मुख्य सड़क तक लाने में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों संजय रावत, नरेश रावत, शैलेंद्र सिंह ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि गांव को मोटरमार्ग से जोड़ दिया जाता, तो ग्रामीणों को अपनी जान नहीं गवांनी पड़ती। आज तक मुख्य मोटर मार्ग से गांव तक कोई भी सड़क निर्माण नहीं किया गया है। यदि समय से महिला को स्वास्थ्य सुविधा मिल जाती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। नकोड़ा कपोला गांव की मुख्य मार्ग से दूरी सात किमी है, जिसे पैदल ही तय करना होता है। जहां पूरी विधानसभा में सड़कों के जाल बिछ चुके हैं। वहीं इन दो गांव में सड़क न होने से ग्रामीण खासे नाराज हैं। संजय रावत ने बताया कि साल 2019 में जगत सिंह रावत की चोट लगने पर चिकित्सा सुविधा न मिलने से पहले उनकी मौत हो गई थी, जबकि कई गर्भवती महिलाओं के प्रसव रास्ते भी रास्ते ही हो चुके हैं। जिसमें जान का खतरा बना रहता है।