मौसम में आ रहे बदलाव खेती-बागवानी पर भारी पड़ रहे हैं। चार माह से सूखे के चलते जनपद में रबी की फसल चौपट हो गई है, जबकि बीते साल इन्हीं महीनों में अतिवृष्टि से फसल बर्बाद हुई थी।
इस बार प्रशासन ने तहसील क्षेत्र में अभी तक सूखे से बीस फीसदी फसल के नुकसान का आकलन किया है। बीते नवंबर से अभी तक क्षेत्र में बारिश नहीं होने से गेहूं, जौ, सरसों, मटर, मसूर आदि रबी की फसल सूखे की चपेट में है। किसानों की मानें तो अब इन फसलों का बचना मुश्किल है।
राजस्व विभाग ने भी चिन्यालीसौड़ तहसील क्षेत्र में इस बार सूखे से बीस फीसदी फसल के नुकसान का आकलन किया है।
हैरानी की बात है कि बीते साल इन्हीं महीनों में अतिवृष्टि और ओलों की मार से रबी की फसल बर्बाद हुई थी, जिसका मुआवजा किसानों को अभी तक नहीं मिल पाया है।
सूखा प्रभावित चमियारी की प्रधान वृंदा देवी, गमरी की कृष्णा देवी, बादसी की कविता नौटियाल, तुनाल्का के नत्थीलाल, कोट के वीरेंद्र पंवार आदि का कहना है कि हर साल मौसम में आ रहे बदलाव से किसानों की खेती और बागवानी पर टिकी आजीविका चौपट होती जा रही है। सिंचाई योजनाओं पर करोड़ों का बजट खर्च होने के बाद भी खेती मौसम की मेहरबानी पर टिकी है।
कोट...
शासन के निर्देश पर क्षेत्र में सूखे से फसलों को हुई क्षति का आकलन कराया गया है। अभी तक क्षेत्र में बीस फीसदी नुकसान की सूचना है। बीते साल अतिवृष्टि से हुए नुकसान का क्षेत्र में साठ लाख रुपये मुआवजा बांटा जा चुका है। तथा सवा करोड़ अभी और बांटा जाना है। शासन से बजट मिलते ही मुआवजा बांटा जाएगा।
एनएस रावत, तहसीलदार, चिन्यालीसौड़।
कोट...
बीते दस सालों के मुकाबले इस बार सर्दियों में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है। रबी की बची हुई फसल को कुछ हद तक बचाने के लिए फरवरी में करीब साठ मिलीमीटर बारिश की जरूरत है। मौसम में आ रहे बदलाव के अनुसार फसल चक्र अपनाकर ही इस स्थिति से उबरा जा सकता है।
डा. वीके सचान, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़।