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घराटों के उत्पादों को नहीं मिल रहा बाजार

Wed, 10 Feb 2016 08:52 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला उत्तराकशी
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उत्तरकाशी। घराट से पिसे गेहूं, मंडुआ, जौ, मक्की और रामदाना के आटे की बाजार में भारी मांग है। सरकार भी पारंपरिक घराटों को उच्चीकृत कर उनकी पिसाई क्षमता बढ़ाने के साथ ही बिजली उत्पादन आदि गतिविधियों के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। ऐसे में घराट से तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का इंतजाम हो, तो जिले में ही दो हजार से ज्यादा बंद पड़े घराटों को पुनर्जीवित करने के साथ ही सस्ती रोशनी का विकल्प भी तैयार हो सकता है।
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घराट से आटा पिसाई के साथ चुल्लू एवं सरसों का तेल भी निकाला जा सकता है। कई घराटों में तो पांच किलोवाट तक बिजली उत्पादन भी हो रहा है। वर्ष 2012- 13 की आपदा के समय विद्युत आपूर्ति ठप होने पर बड़ेथी चुंगी के मदन सिंह राणा तथा गणेशपुर के बलिराम बधानी के घराट से उत्पादित बिजली गांव में रोशनी का सहारा बनी। स्वामी रामदेव का पतंजली संस्थान भी कई सालों से अपना ब्रांडेड आटा यहीं के घराटों से पिसवा कर तैयार कर रहा है।

अनुदान डकारने तक सिमटी योजना
अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) के सर्वे के अनुसार जनपद में 2075 घराट हैं, लेकिन इनमें अधिकांश बंद पड़े हैं। विभाग द्वारा इस साल 35 घराटों को उच्चीकृत कराया जा रहा है। इसमें दस मैकेनिकल और 25 इलैक्ट्रिकल घराट हैं। इलैक्ट्रिकल घराट के लिए डेढ़ लाख और मैकेनिकल घराट के लिए पचास हजार रुपये अनुदान की व्यवस्था है। देखने में आ रहा है कि घराट उच्चीकरण के लिए पूर्व में बनी उत्तरा घराट विकास समिति को दरकिनार कर अधिकारियों ने ठेकेदारी प्रथा पर काम सौंप दिया है। घराट स्वामी की भागीदारी नहीं होने से करीब पांच लाख के सरकारी अनुदान से तैयार नाकुरी का इकलौता मॉडल घराट तक ठप पड़ा है। यह योजना महज अनुदान डकारने तक सिमट रही है।
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कोट...
आपदा के सालों को छोड़ वर्ष 2009-10 से जिले में 64 इलैक्ट्रिकल एवं 21 मैकेनिकल घराट लगाए गए। इस साल भी 35 घराट तैयार किए जा रहे हैं। लोग अनुदान का फायदा उठाकर बहुउद्देशीय घराट चलाएं, तो यह कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है।
मनोज कुमार, परियोजना अधिकारी उरेडा।

कोट...
अकेले रानू की गाड और वरुणा नदी के 12 किमी क्षेत्र में दर्जनों घराट लग सकते हैं, जो बिजली भी देंगे और कुटाई-पिसाई भी करेंगे। उरेडा की ओर से घराट लगाने का काम लाभार्थी की सहभागिता के बजाय ठेकेदारी व्यवस्था से कराने के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे।
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मदन सिंह राणा, अध्यक्ष उत्तरा घराट विकास समिति उत्तरकाशी।
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