उत्तरकाशी। इस बार सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से मनेरी भाली प्रथम एवं द्वितीय चरण परियोजना में विद्युत उत्पादन प्रभावित हो रहा है। भागीरथी नदी में महज 25 से 35 क्यूमेक्स पानी मिलने से 394 मेगावाट की दोनों परियोजनाओं से रोजाना महज 2.17 मिलियन यूनिट उत्पादन ही हो पा रहा है। विद्युत उत्पादन के लिए बैराज पर ज्यादा से ज्यादा पानी रोकने की मजबूरी के चलते मनेरी और जोशियाड़ा बैराज की डाउन स्ट्रीम में गंगा भागीरथी लगभग जल विहीन पड़ी है।
यूं तो हर साल सर्दियों में उच्च हिमालयी क्षेत्र में कड़ाके की ठंड के चलते भागीरथी के वाटर डिस्चार्ज में गिरावट आने से 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम और 304 मेगावाट की स्टेज टू परियोजना में विद्युत उत्पादन प्रभावित होता है, लेकिन इस बार सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से भागीरथी में बहुत कम पानी है। इसका सीधा असर परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन पर पड़ रहा है। मनेरी बैराज पर महज 25 क्यूमेक्स पानी पहुंच रहा है, जिससे तिलोथ पावर हाउस में सुबह और शाम को दो टरबाइनें चलाकर रोजाना बमुश्किल 0.67 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है। इसी तरह जोशियाड़ा बैराज से सिर्फ 35 क्यूमेक्स पानी मिलने के कारण धरासू पावर हाउस में भी रोजाना 1.5 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा है।
भागीरथी में पानी की कमी के चलते जल विद्युत निगम मनेरी और जोशियाड़ा बैराज पर ज्यादा से ज्यादा पानी रोकने को मजबूर है। यही कारण है कि बैराज से पानी नहीं छोड़े जाने के कारण मनेरी से उत्तरकाशी और जोशियाड़ा से धरासू के बीच गंगा भागीरथी में सिर्फ रास्ते में मिलने वाले गाड गदेरों का ही पानी बह रहा है। हालांकि निगम के अधिकारी मनेरी बैराज से करीब दो क्यूमेक्स तथा जोशियाड़ा बैराज से पांच क्यूमेक्स पानी छोड़ने का दावा कर रहे हैं, जबकि लगभग जल विहीन हुआ भागीरथी का प्रवाह पथ कुछ और ही बयां कर रहा है।
बैराज से छोड़ रहे हैं जरूरत का पानी
मनेरी बैराज का ऑपरेशन देख रहे जल विद्युत निगम के ईई हरीश ढपोला और जोशियाड़ा बैराज के ईई जितेंद्र आर्य ने स्वीकारा कि आजकल भागीरथी में पानी की कमी के कारण विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि बैराज से आगे फ्लशिंग कंड्यूट गेट से मानकों के अनुसार गंगा भागीरथी की जरूरत लायक पानी छोड़ा जा रहा है।