यमुनोत्री-गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव उत्तरकाशी में कूड़ा निस्तारण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। पालिका प्रशासन कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए अब तक चार जगह बदल चुकी है। वर्तमान में पालिका शहर से करीब दो किमी दूर तिलोथ में कूड़ा निस्तारण केंद्र बना रही है, लेकिन यहां भी ग्रामीण विरोध में उच्च न्यायालय की शरण में है। पालिका भी मान रही है कि यदि यहां कूड़ा निस्तारण केंद्र नहीं बना, तो संभावनाएं ही समाप्त हो जाएगी।
पालिका क्षेत्र की आबादी करीब 30 हजार है। यहां प्रतिदिन 10 टन कूड़ा एकत्र होता है, लेकिन पालिका का कूड़ा निस्तारण केंद्र न होने से शहर के लिए कूड़ा एक समस्या बना हुआ है। कूड़ा निस्तारण के लिए पालिका गंगोरी, कंसेण, मांडो में प्रयास कर चुकी है। लेकिन सभी स्थानों पर ग्रामीणों के विरोध के चलते कूड़ा निस्तारण केंद्र नहीं बन पाया। अभी वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर तांबाखाणी में भागीरथी किनारे कूड़ा डंप किया जा रहा है। वर्तमान में शहर से करीब दो किमी दूर उत्तरकाशी-लंबगांव मोटर मार्ग पर तिलोथ में पालिका का कूड़ा निस्तारण केंद्र बन रहा है, लेकिन यहां भी तिलोथ के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल का कहना है कि तिलोथ में कूड़ा निस्तारण केंद्र का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन यहां भी ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। ग्रामीण न्यायालय भी गए है। ग्रामीण डंपिंग जोन व निस्तारण केंद्र में फर्क नहीं समझ पा रहे हैं।