जनपद मुख्यालय के निकट स्यूंणा के ग्रामीण हर वर्ष सर्दियों में भागीरथी नदी पर अस्थायी पुल का निर्माण करते हैं, जो गर्मियों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही बह जाता है। तब ग्रामीणों को नदी पार सड़क मार्ग तक आने के लिए 6 से 7 किमी का अतिरिक्त पैदल सफर करना पड़ता है। जबकि पुल निर्माण के बाद सड़क मार्ग तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को मात्र पांच से सात मिनट का समय लगता है।
जनपद मुख्यालय से मात्र चार किमी की दूरी पर स्थित स्यूंणा के ग्रामीण लंबे समय से भागीरथी नदी में गांव के समीप पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। गांव में वर्तमान में 30 से 35 परिवार निवास कर रहे हैं। पुल सुविधा न होने से ग्रामीण सड़क मार्ग के बिल्कुल समीप होने के बावजूद 6 से 7 किमी का पैदल सफर तय कर तेखला पुल पर पहुंचते हैं। सर्दियों में अलकनंदा का जलस्तर कम होने पर ग्रामीण गांव के समीप भागीरथी नदी में हर वर्ष स्वयं पत्थर, बल्लियों और लकड़ियों की मदद से अस्थायी पुलिया का निर्माण करते हैं, लेकिन गर्मियों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही पुल बह जाता है। प्रधान राजेश सेमवाल, महेंद्र, सुरेंद्र प्रताप भट्ट, देवेंद्र आदि ने कहा कि न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधि उनकी सुध ले रहे हैं। बताया कि प्रशासन ने इलेक्ट्रानिक ट्राली लगाने की बात कही थी, लेकिन बाद में हाथ से खींचने वाली सामान्य ट्राली लगा दी। जिसकी स्थिति जर्जर हो गई है।