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देवलांग मेला : राजा रघुनाथ मंदिर प्रांगण में जलाई मशाल

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यमुनाघाटी के गैरबानाल में देवलांग पर्व में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़। स्रोत जागरूक पाठक
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कड़ाके की ठंड के बावजूद मेले में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़, महासू महाराज से की सुख-समृद्धि की कामना
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बड़कोट। रवाईं घाटी में देवलांग मेला मनाया गया। कड़ाके की ठंड के बावजूद ग्रामीणों की खूब भीड़ उमड़ी। ग्रामीणों ने महासू महाराज राजा रघुनाथ से सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर गैर बनाल स्थित राजा रघुनाथ मंदिर प्रांगण में मशाल जलाई गई।
मान्यता है कि जब भगवान राम वनवास से अयोध्या लौटे तो पहाड़ी राज्यों में इसकी सूचना ग्रामीणों को एक महीने बाद मिली। भगवान राम के वनवास से वापसी की खुशी में ही यहां देवलांग मेले की शुरुआत हुई। मेले में एक लंबे देवदार के पेड़ को मंदिर प्रांगण में खड़ा किया जाता है जिस पर साठी पानसाई थोक के लोग छोटी मशालों से आग लगाकर जलाते हैं। साथ ही राजा रघुनाथ (भगवान राम) की गाथा को गाते हैं।
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रातभर चलने वाले आयोजन में ग्रामीण तांदी व झुमेला नृत्य करते हैं। कार्यक्रम में गैर बनाल क्षेत्र से राज्य दिव्यांग बोर्ड सलाहकार समिति के सदस्य सुरेंद्र सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य पवन सिंह पंवार, प्रदीप गैरोला, विवेक रतूड़ी, सुखदेव रावत, महिदर गैरोला, किताब सिंह रावत, प्रेम सिंह चौहान, बलवंत सिंह, शिव प्रसाद गौड़ मौजूद रहे।
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नहीं पहुंचा सरकार का कोई प्रतिनिधि
यमुना घाटी के बनाल क्षेत्र के लगभग 70 गांव का यह पौराणिक मेला राजकीय मेला घोषित है लेकिन मेले में उत्तराखंड सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं पंहुचा। जिस पर लोगों ने नाराजगी व्यक्त की। हालांकि लोगों के भीतर अपनी पौराणिक संस्कृति के प्रति उत्साह रहा।
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