यमुनाघाटी के बारह गांव की आराध्य मां भद्रकाली की डोली के साथ श्रद्धालु।
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यमुना घाटी के 12 गांव की आराध्य देवी मां भद्रकाली की मूर्ति जन्माष्टमी पर पौंटी गांव स्थित मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने देवी की मूर्ति के दर्शन किए। अब दो दिन तक भादों की जातर के नाम से मेलों की श्रृंखला शुरू होगी, जिसका पहला मेला पौंटी गांव में आयोजित किया जाएगा।
भद्रकाली की पालगी पौंटी गांव सहित मोल्डा, हुडोली, पाणीगांव, नैलाड़ी, कंताड़ि, बीणाई, खांसी, पलेठा, सुनारा और सौंदाड़ि गांव का भ्रमण कर रात्रि प्रवास करेगी। इस दौरान प्रत्येक गांव में माता के नाम से भादों की जातर मनाई जाएगी। मेले के दौरान गांव की महिलाएं पारंपरिक पहनावे के साथ नृत्य करती हैं। डेढ़ सप्ताह तक क्षेत्र में मेलों की रौनक रहती है। मेलों की श्रृंखला समाप्त होने के बाद भद्रकाली की मूर्ति पुन: मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान हो जाएगी। पौंटी और मोल्डा गांव में भद्रकाली के प्राचीन मंदिर हैं, जहां बारी-बारी से एक-एक वर्ष के लिए मूर्ति को स्थापित किया जाता है। इस वर्ष मोल्डा गांव में मूर्ति स्थापित होंगी। भद्रकाली के पुजारी देव प्रसाद बहुगुणा और पौंटी गांव के प्रधान विनोद जेंतवांण का कहना है कि भादों की जातर के लिए लोगों में उत्साह है। बारह गांव में श्रृंखलावार मेलों का आयोजन होता है। मेला की श्रृंखला 11 अगस्त को पुरोला ब्लॉक के सौंदाड़ि गांव में समाप्त हो जाएगी।