फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपदा में सड़कें तबाह होने से खतरे में पड़ी आपदा प्रभावितों की आजीविका

विज्ञापन
नगवाड़ा टिकोची में आपदा में तबाह हुई सड़क के साथ खड्ड में गिरी बस। - फोटो : UTTER KASHI
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे आराकोट मोरी क्षेत्र में आई आपदा में क्षेत्र की लाइफ लाइन कही जाने वाली चार प्रमुख सड़कें तबाह होने से अब लोगों की सेब से जुड़ी आजीविका पर खतरा मंडराने लगा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि खेत-बगीचे पहले ही आपदा में तबाह हो गए हैं, यदि सरकार ने तबाह हुई सड़कों पर शीघ्र यातायात बहाल नहीं किया तो बची हुई सेब की फसल भी मंडियों का मुंह नहीं देख पाएगी।
विज्ञापन

रविवार सुबह आई आसमानी आफत ने आराकोट, माकुड़ी, टिकोची क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। ऊंची पहाड़ियों से आई जल प्रलय ने न केवल घर, मकान, दुकान, खेतों में खड़ी फसल और बागवानी को भारी नुकसान पहुंचाया, बल्कि आराकोट-चिवां, बरनाली-माकुड़ी, किराणू-दुचाणू और बरनाली-झोटाड़ी मोटर मार्ग को भी तबाह करके रख दिया। इन सड़कों से माकुड़ी, कलीच, थुनारा, डामटी, भूटाणू, मैंजणी, पावली, चिवां, जागटा, बरनाली, गोकुल, झोटाड़ी, खक्वाड़ी, बलावट, मौंडा आदि गांवों का बागवानी क्षेत्र जुड़ा है। इन क्षेत्रों में सेब के बगीचों को आपदा में भारी नुकसान पहुंचने के साथ ही अब सड़कें तबाह होने से बची हुई सेब की फसल को मंडियों तक पहुंचाने का संकट खड़ा हो गया है।
माकुड़ी के सेब किसान मदन सिंह रावत, मौंडा के आशीष चौहान आदि का कहना है कि यदि सरकार ने आपदा से क्षतिग्रस्त सड़क को 15 दिन के भीतर दुरुस्त नहीं किया तो क्षेत्र में सेब की तैयार फसल बगीचों में ही सड़ जाएगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में किसानों की आजीविका मुख्य रूप से सेब पर ही टिकी है। फतेहपर्वत क्षेत्र में धौला से बसी एवं सेवा गांव के पैदल रास्ते पूरी तरह तबाह पड़े हैं। सेवा के प्रधान पटवारी सिंह ने बताया कि दस किमी लंबा यह रास्ता चलने लायक नहीं है, ऐसे में सेब का ढुलान कैसे करेंगे। उद्यान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मोरी में बीते साल 5465 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था। इसमें अधिकांश आराकोट बंगाण क्षेत्र में होता है। इस साल सर्दियों में अच्छी बर्फबारी से सेब उत्पादन दोगुना होने की उम्मीद थी।
विज्ञापन

बाक्स----------
बड़ी संख्या में पशुधन को पहुंचा नुकसान
उत्तरकाशी। आराकोट क्षेत्र में एक सौ से ज्यादा मवेशी भी आपदा की भेंट चढ़ गए। आराकोट के महेंद्र राणा बताते हैं कि अकेले आराकोट गांव से ही 60 से ज्यादा पालतू पशु मलबे में दफन हो गए, जबकि क्षेत्र में मौंडा, बलावट, माकुड़ी, टिकोची आदि गांवों में भी बड़ी मात्रा में पशु धन को हानि पहुंचने की सूचना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें