जनपद के प्रसिद्ध पौराणिक व ऐतिहासिक माघ मेले के आयोजन पर संशय के बादल 21 दिसंबर को छटेंगे। जिला पंचायत ने मेले के आयोजन पर निर्णय व रूपरेखा तय करने के लिए बैठक बुलाई है।
माघ मेले (बाड़ाहाट कु थौलू) का शुभारंभ हर वर्ष मकर संक्रांति से होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मेला महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। जबकि ऐतिहासिक महत्व यह है कि यह मेला भारत और तिब्बत के व्यापार का गवाह रहा है। बताते हैं कि आजादी से पहले तिब्बत के व्यापारी यहां सेंधा नमक, ऊन, सोना जड़ी-बूटी, गाय, घोड़े बेचने के लिए आते थे। तब यह मेले की अवधि एक माह तक होती थी। तिब्बत के व्यापारी यहां से धान, गेहूं आदि लेकर लौटते थे। अब वर्षों से मेले का आयोजन जिला पंचायत की ओर से रामलीला मैदान में होता आ रहा है। कोविड काल के चलते पिछले दो वर्ष से मेले का आयोजन नहीं हो पाया है। वहीं इस बार भी मेले के आयोजन को लेकर संशय बना हुआ है।
जनवरी में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगनी है। ऐसे में मेले का आयोजन जिला प्रशासन कराएगा या फिर जिला पंचायत इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिला पंचायत ने आयोजन पर निर्णय लेने के लिए 21 दिसंबर को बैठक बुलाई है। जिला पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि बैठक में जिला प्रशासन, पालिका प्रशासन सहित जनप्रतिनिधि भी बुलाए गए हैं।
मेले के आयोजन स्थल को लेकर भी संशय बना हुआ है। अभी तक मेला शहर के बीचों बीच स्थित रामलीला मैदान में आयोजित होता आया है। लेकिन इस बार मैदान के काफी बड़े हिस्से पर पालिका ने लाखों की लागत से हरी घास लगाई है। यदि यहां मेला हुआ, तो खेल तमाशों व मेलार्थियों की भीड़ के चलते घास नष्ट हो जाएगी। जिससे पालिका को लाखों का नुकसान होगा।
- मेले के आयोजन पर स्थिति स्पष्ट किए जाने के लिए 21 दिसंबर को बैठक बुलाई गई है। बैठक में जिला प्रशासन, पालिका प्रशासन के साथ ही जनप्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। - संजय सिंह, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत उत्तरकाशी।