बीते 14 मार्च को संक्रांति के दिन से शुरू हुआ पारंपरिक फूलदेई पर्व रविवार को संपन्न हुआ। आठ दिनों तक मंदिरों व घरों की देहरी पर रंगबिरंगे फूल डालने वाले बच्चों ने सब ने भेंट दी। बच्चों ने सामूहिक भोज कर जश्न मनाया।
आठ दिनों तक चला यह पारंपरिक पर्व रविवार को संपन्न हो गया। घर एवं मंदिरों में पहुंचे बच्चों को गृह स्वामियों ने पैसे, खाद्यान्न आदि सौगात भेंट कीं। वरुणावत शीर्ष पर स्थित संग्राली गांव में कंडार देवता मंदिर परिसर में फूलदेई पर्व का समापन किया गया। इस मौके पर ग्राम प्रधान संदीप सेमवाल, विमला नैथानी, सर्वेश्वरी देवी, हेमलता, कुसुम, पूजा आदि मौजूद रहे।
इधर, काशी विश्वनाथ मंदिर में फूलदेई पर्व के समापन पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, संस्कृति बचाओ’ थीम पर मंदिरों में रोज फूल डालने वाली 21 बालिकाओं को पठन सामग्री एवं दक्षिणा भेंट की गई। मंदिर के महंत अजय पुरी ने इन बच्चियों का तिलक वंदन किया। शक्ति मंदिर की ओर से इन बच्चियों को चुनरी प्रदान की गई। इस मौके पर कन्हैया सेमवाल, माधव भट्ट, संजीव अरोड़ा, मोहन डबराल, मनीष रावत, अंकित ममगाईं, विनोद असवाल, जमुना उनियाल, किरन पंवार, अमरावती नेगी, किरन खरोला, ऊषा जोशी, विमला बिष्ट मौजूद थे।