त्तरकाशी के दयारा बुग्याल में आयोजित बटर फेस्टिवल में खुशी व्यक्त करता एक व्यक्ति।
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भाद्रपद संक्रांति पर दयारा बुग्याल में पारंपरिक अढूड़ी उत्सव (बटर फेस्टिवल) का आयोजन किया गया। उत्सव में रंगों की नहीं बल्कि रैथल गांव के लोग मक्खन व छाछ की होली खेलते हैं। ग्रामीण अपने मवेशियों की रक्षा व दूध के उत्पादन में वृद्धि के लिए लोक देवताओं का आभार जताने के लिए हर साल इस उत्सव का आयोजन करते हैं।
मंगलवार को भाद्रपद संक्रांति पर दयारा बुग्याल में पारंपरिक अढूड़ी उत्सव (बटर फेस्टिवल) के दौरान रैंथल के ग्रामीणों ने जम कर मक्खन व दूध की होली खेली। बटर फेस्टिवल के दौरान ग्रामीणों ने दयारा बुग्याल में पारंपरिक रासौ नृत्य भी किया। राधा कृष्ण बने कलाकारों ने भी खूब नृत्य किया। समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल में रैथल के ग्रामीण गर्मियों की शुरूआत में ही अपने मवेशियों के साथ छानियों में चले जाते हैं। सावन की समाप्ति के साथ ही ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ने लगती है।
ग्रामीण अपने मवेशियों के साथ गांव की ओर लौटते हैं। कई महीनों तक इतनी ऊंचाई पर मवेशियों की रक्षा करने और दूध उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि पर ग्रामीण गांव लौटने से पहले भाद्रपद महीने की संक्रांति को यहां दूध मक्खन मट्ठा की होली खेलकर लोक देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। दयारा पर्यटन उत्सव समिति रैथल बीते कई वर्षों से पर्यटकों को इस आयोजन से जोड़ने के लिए बड़े व भव्य स्तर पर बटर फेस्टिवल का आयोजन करती आ रही है, लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार दयारा बुग्याल में स्थानीय ग्रामीणों ने सीमित स्तर पर फेस्टिवल का आयोजन किया। बीते वर्ष भी कोरोना संकट के चलते बाहरी पर्यटकों के बिना ही स्थानीय ग्रामीणों के साथ दूध मक्खन मट्ठा की होली खेली गई थी।
इस मौके पर दयारा पर्यटन उत्सव समिति के अध्यक्ष मनोज राणा, प्रधान सुशीला देवी, सुरेश रतूड़ी, पंकज कुशवाल, राजवीर रावत, मोहन कुशवाल, रामचंद्र पंवार, महेंद्र राणा, मनीष कुमार, बुद्धि लाल आदि मौजूद रहे।