धनारी क्षेत्र के नागणी ठांग में बंद रसोई में एक भरड़ मृग फंस गया। शनिवार को नागणी मंदिर के दर्शन के लिए वहां पहुंचे पर्यटकों ने उसे जंगल में छोड़ा। नागणी ठांग स्थित देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
यहां मंदिर के निकट साधु संत एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक कुटिया और रसोई बनी है। यहां एक संत साधनारत रहते हैं। इस बार सर्दियों में अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने से वहां पानी उपलब्ध नहीं हुआ। ऐसे में वह दो माह से वहां नहीं थे।
शनिवार को उत्तरकाशी से नागणी मंदिर दर्शन के लिए यहां पहुंचे पर्यटक जब कुटिया की ओर गए तो वहां रसोई में एक भरड़ मृग फंसा हुआ था। इन पर्यटकों ने बड़ी मशक्कत से रसोई का दरवाजा खोला तब भरड़ मृग जंगल की ओर भाग गया।
पर्यटक दल में शामिल पशु चिकित्सक डा.योगिता ने रसोई के भीतर भरड़ द्वारा फैलाए गए मलमूत्र से अंदाजा लगाया कि वह चार-पांच दिन से फंसा था और बहुत डरा हुआ था। भरड़ के जंगल लौट जाने पर पर्यटकों ने सुकून महसूस किया। दल में प्रमोद राणा, सुमन, शैलेंद्र मटूड़ा, गौरव चौहान, राजीव, हिमानी आदि शामिल थे।