वित्तीय वर्ष का अंत नजदीक आने के साथ ही विभिन्न विकास योजनाओं के लिए मिला बजट खर्च करने की कवायद तेज हो गई है। डीएम विनय शंकर पांडेय ने जिला योजना, राज्य सेक्टर एवं केंद्र पोषित योजनाओं की समीक्षा कर संबंधित विभागों को वित्तीय वर्ष के अंत तक शत प्रतिशत बजट खर्च करने के निर्देश जारी किए। कई योजनाओं पर विवाद के चलते कई बार जिला योजना को निरस्त किया गया, जिससे अभी तक 40 फीसदी बजट भी खर्च नहीं हो पाया है।
समीक्षा बैठक में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी डा. दिनेश बडोनी ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में 53.59 करोड़ की जिला योजना के सापेक्ष 31 दिसंबर तक 20.74 करोड़ रुपये खर्च हुआ, जबकि राज्य सेक्टर में 139.14 करोड़ के सापेक्ष 112.92 तथा केंद्र पोषित योजनाओं में 84.55 करोड़ के सापेक्ष 66.17 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
बता दें कि इस बार स्वीकृत योजनाओं पर विवाद के चलते एक बार जिला योजना निरस्त कर दी गई थी। देर से स्वीकृति के चलते अधिकांश विकास योजनाएं अभी तक अधर में हैं।
डीएम ने जिला योजना में धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने सभी विभागों को वित्तीय वर्ष के अंत तक शत प्रतिशत बजट खर्च करने के निर्देश दिए।
विभागवार समीक्षा में डीएम ने लोनिवि तथा निर्माण खंड एडीबी और विश्व बैंक को सड़क एवं पुल निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सिंचाई विभाग को सिंचाई नहर निर्माण को प्राथमिकता देने को कहा।
पर्यटन विभाग की योजनाओं के आगणन तैयार करने में हो रहे विलंब को देखते हुए डीएम ने शीघ्र आगणन तैयार नहीं होने पर कार्यदायी संस्था बदलने के निर्देश दिए। बैठक में सीडीओ जीएस रावत, डीएफओ गिरीश रस्तोगी, डिप्टी कलक्टर कमलेश मेहता, डीडीओ आनंद सिंह आदि मौजूद रहे।