उन्होंने बताया कि वे गंगोत्री धाम से गंगा जैसी निर्मल व कल्याणकारी सरकार को चुनने आए हैं, ताकि भावी सरकार सदियों से हिमालय की कंदराओं में साधना कर रहे साधु संतों की सुरक्षा कर सके। साथ ही मां गंगा, हिमालय व समाज के हर वर्ग के व्यक्ति का संरक्षण व संवर्द्धन कर देश का विकास कर सके।
साल भर गंगोत्री धाम में रहने वाले स्वामी आत्मानंद व तपोवन से साधना कर लौटे स्वामी नागरदास ने धाम में पहली बार बूथ बनने पर जिला प्रशासन व चुनाव आयोग का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पहले सभी साधु संतों को वोट देने के लिए तीस किमी दूर धराली जाना पड़ता था। तब कई बार तबियत बिगड़ने और यातायात की सुविधा नहीं मिलने से कई साधु संत वोट नहीं डाल पाते थे, लेकिन इस नई व्यवस्था से संत समाज को सुविधा के साथ ही लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा बनने का भी अवसर मिला है।
स्वामी विमुक्तानंद सरस्वती अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए सीधे कोलकाता से पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र के इस पर्व का हिस्सा बनने के अवसर को वह खोना नहीं चाहते थे, इसलिए कोलकाता से गुरुग्राम होते हुए वह वोट देने पहुंचे हैं। साधु संतों में मतदान के प्रति उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज 141 मतदाताओं वाले गंगोत्री पोलिंग बूथ पर शुरूआती एक घंटे में ही तीस लोग मतदान कर चुके थे। साढ़े आठ बजे बाद अपनी गुफा एवं कुटियाओं से निकलकर साधु संतों के पोलिंग बूथ पहुंचने का सिलसिला तेज हो गया था। देर शाम तक कुल 67 मतदाताओं ने वोट डाले।