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मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए महिलाओं को दी नेपियर घास, तेजपता व नींबू प्रजाति के फल उगाने की सलाह

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उत्तरकाशी। अमर उजाला के अपराजिता महाभियान के तहत असी गंगा घाटी के दूरस्थ सेकू गांव में गोष्ठी का आयोजन किया गया। हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) के सहयोग से आयोजित गोष्ठी में महिलाओं ने मानव वन्यजीव संघर्ष, चकबंदी सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा की। महिलाओं ने सेकू से मांझी तक बनाई गई सड़क को पुनर्जीवित करने की मांग उठाई।
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सेकू गांव स्थित नाग देवता मंदिर प्रांगण में उप प्रधान हेमा देवी की अध्यक्षता में गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं ने कहा कि सरकार आज भी चारापत्ती एकत्र करने व मानव वन्यजीव संघर्ष की समस्या का समाधान नहीं निकाल पाई है। ऐसे में महिलाओं को चारपत्ती के लिए जंगल जाना पड़ता है। जाड़ी संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने भालू आदि वन्यजीवों से निपटने के लिए विदेशों की तर्ज पर काली मिर्च का स्प्रे प्रयोग करने की सलाह दी। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमल सिंह रावत ने खेती बाड़ी को सरल बनाने के लिए ग्रामीणों से चकबंदी करने की अपील की। महिलाओं ने सेकू गांव की सड़क का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1910 में सेकू से मांझी तक करीब 10-12 किमी लंबा मोटर मार्ग था, लेकिन सड़क सिमटकर मात्र डेढ़ किमी तक रह गई है। साथ ही डोडीताल आने वाले पर्यटकों को भी सुविधा मिल सकेगी। बैठक में शिवानी देवी, सीता देवी, रामदेई, सरस्वती देवी, सरोज देवी, सविता देवी, उजला देवी, ममता देवी, सुनीता देवी, रविंद्री देवी, मनवीर सिंह, अवतार सिंह आदि मौजूद रहे।

गांव की महिलाएं आज भी चारापत्ती के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों जाने को मजबूर हैं। जहां होने वाली दुर्घटनाओं में न केवल महिलाएं बल्कि उनके परिवार को भी प्रभावित होना पड़ता है। इस समस्या का समाधान होने के बाद ही हम सरकार के विकास के दावों को सही मानेंगे।
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- राजबाला देवी, सेकू गांव।

जंगली जानवरों द्वारा फसल बर्बाद करने से ग्रामीणों की आर्थिकी प्रभावित हो रही है, लेकिन सरकार अभी तक समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकाल पाई है। हालांकि जाड़ी संस्था ने बीज बम अभियान की जानकारी दी है।
- भाग्यानी देवी, सेकू गांव।

जिला मुख्यालय के निकट होने के बावजूद सेकू गांव सहित असी गंगा घाटी के कई गांव आज भी सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं। अंग्रेजों ने जिन स्थानों पर सड़क बनाई थी, सरकार उन्हें भी सुचारु नहीं रख सकी। अगर सेकू से मांझी तक सड़क को पुनर्जीवित कर दिया जाए, तो क्षेत्र का विकास हो सकेगा।
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-हेमा देवी, उप प्रधान, सेकू गांव।
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