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तिर्खली कुंसाला पैदल मार्ग का दस मीटर हिस्सा बहने से बढ़ी यात्रियों और ग्रामीणों की दिक्कतें-compat

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बड़कोट। मानसून सीजन में यमुनोत्री धाम यात्रा के लिए पहुंच रहे तीर्थयात्रियों एवं गीठ बजरी पट्टी के ग्रामीणों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। ओजरी डबरकोट में जहां यमुनोत्री हाईवे छह दिनों से ठप पड़ा है, वहीं गदेरे के उफान पर आने से तिर्खली-कुंसाला वैकल्पिक पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया है। अब यात्री एवं ग्रामीण पहाड़ी पर झाड़ियों के सहारे आधा किमी अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर हैं।
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बता दें कि ओजरी डबरकोट में बीते साल से आए दिन यमुनोत्री हाईवे अवरुद्ध होने का सिलसिला जारी है। बीते छह दिनों से तो यहां यातायात पूरी तरह ठप है, जिससे यमुनोत्री धाम की यात्रा पर पहुंच रहे तीर्थयात्री और स्थानीय ग्रामीण तिर्खली-कुंसाला होते हुए चार किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर रहे थे। बुधवार रात को हुई भारी बारिश के चलते यहां चंदोयका खड्ड में उफान आने से इस पैदल रास्ते का करीब दस मीटर हिस्सा तबाह हो गया। अब तीर्थयात्रियों एवं ग्रामीणों को पहाड़ की खड़ी चढ़ाई-उतराई वाले रास्ते से करीब आधा किमी रास्ते में झाड़ियां पकड़ कर दूरी तय करनी पड़ रही है। इस मार्ग से आवाजाही के दौरान खासा जोखिम बना हुआ है।
कुपड़ा गांव की प्रधान अनिता राणा ने बताया कि बीते वर्ष मई में स्यानाचट्टी से कुपड़ा होते हुए तिर्खली तक मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था। इसके तहत चंदोयका खड्ड के ऊपर एक पुल का निर्माण भी होना था, लेकिन पुल की डीपीआर स्वीकृत नहीं होने के कारण निर्माण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर पुल का निर्माण हो जाता है तो स्थानीय ग्रामीणों और तीर्थयात्रियों को भी लाभ होगा। प्रवीन सिंह, महावीर सिंह, भगत सिंह आदि ग्रामीणों ने सरकार तथा शासन-प्रशासन पर यमुनोत्री धाम यात्रा और क्षेत्र के विकास को लेकर खोखले दावे करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि ओजरी डबरकोट स्लाइड जोन सक्रिय होने के बाद से ही लोग वैकल्पिक रास्ते की मांग कर रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि और अधिकारी सुनने को तैयार नहीं। शायद कोई बड़ा हादसा होने पर ही शासन प्रशासन इस पर संज्ञान लेगा।
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