बड़कोट (उत्तरकाशी)। यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्री मां यमुना के शीतकालीन पड़ाव खरसाली में शनि महाराज के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे। शनिवार को बैसाखी के पावन पर्व पर खरसाली स्थित शनि देवता मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
पुराणों के अनुसार सूर्य पुत्री मां यमुना के भाई शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। मां यमुना के शीतकालीन पड़ाव वाले खरसाली गांव में शनि महाराज का प्राचीन मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। लकड़ी एवं पत्थर से बना पांच मंजिला मंदिर क्षेत्र की अनूठी वास्तुकला का नमूना भी है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि मंदिर परिसर में स्थित बेखिर के पेड़ के नीचे शनि देव की उत्पत्ति हुई थी। मंदिर में दो बड़े ताम्र पात्रों (बड़े घड़े) के बारे में मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात को यह दोनों पात्र आपस में स्थान बदल लेते हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना करने से मृत्यु के भय से मुक्ति मिलने के साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
यमुनोत्री धाम के आखिरी सड़क पड़ाव जानकीचट्टी से महज एक किमी की सड़क दूरी पर स्थित खरसाली गांव में मंदिर के दर्शन के लिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। सर्दियों में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं, जो हर वर्ष बैसाखी के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाते हैं। यात्रा सीजन में देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्री खरसाली पहुंचकर मंदिर के दर्शन एवं पूजा-अर्चना का पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं। तीर्थ पुरोहित प्यारे लाल उनियाल ने बताया कि शनिवार बैसाखी पर शुभ मुहूर्त के अनुसार प्रात: आठ बजे विशेष पूजा-अर्चना के साथ शनि मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इस मौके पर क्षेत्र के 12 गांवों के ग्रामीणों समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहेंगे।