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सफाई कर्मियों को मिलें संसाधन और सुविधाएं तो दिखावटी स्वच्छता अभियानों की जरूरत नहीं

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उत्तरकाशी। गंदगी के ढेर में रहकर नगरवासियों को स्वच्छ वातावरण देने वाले सफाई कर्मचारी बदहाली की मार झेलने को मजबूर हैं। आलम यह है कि स्वच्छता के दावे करने वाली पालिका और जिला प्रशासन इन कर्मचारियों को बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं करा पा रहे हैं।
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पालिका बाड़ाहाट में 29 स्थाई तथा 38 संविदा सफाई कर्मचारी तैनात हैं। पालिका ने 38 संविदा कर्मचारियों को बीते नौ माह से वेतन नहीं मिला है, जबकि 29 स्थाई कर्मचारियों का जनवरी का वेतन अभी तक नहीं आया है। सफाई कर्मचारियों को मिलने वाली वर्दी बीते चार साल से नहीं मिली।
सफाई कर्मचारियों के हेड प्रीतम का कहना है कि पालिका प्रशासन ने कभी सफाई कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने की जहमत तक नहीं उठाई। शासन-प्रशासन एक दिन के स्वच्छता अभियान पर ही लाखों रुपये खर्च कर देता है, लेकिन सफाई कर्मचारियों की सुध लेने को राजी नहीं। वरिष्ठ चिकित्सक जिला अस्पताल डा. एसडी सकलानी का कहना है कि कचरे के ढेर एवं गंदगी में मौजूद खतरनाक केमिकल एवं दुर्गंध से कई जानलेवा बीमारियों का खतरा रहता है। सफाई कर्मचारियों में फेफड़े, त्वचा एवं पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियां ज्यादा हो रही हैं। इससे बचने के लिए सफाई करते समय दस्ताने, मास्क आदि का उपयोग जरूरी है। ईओ सुशील कुमार कुरील का कहना है कि संविदा पर तैनात सफाई कर्मचारियों को दो माह का रुका हुआ वेतन दे दिया गया है। बजट की कमी दूर होते ही शेष वेतन भी दे दिया जाएगा।
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