उत्तरकाशी। जानकारी के अभाव में गांव के लोग च्यवनप्राश, धातु पौष्टिक चूर्ण तथा शक्तिवर्धक औषधियों में प्रयुक्त होने वाले कौंच को उगा कर आजकल आयुर्वेदिक कारखाने में देने के बजाय उसकी सब्जी बनाकर खा रहे हैं। बाजार में कौंच की फलियां 40 रुपये किलो मिल रही है।
वरिष्ठ आयुर्वेदि चिकित्सक डा. रामचंद्र उनियाल बताते हैं कि कौंच उम्र बढ़ाने वाली दवा के साथ पौष्टिक सब्जी भी है। शुक्रवर्द्धक होने के साथ उम्र बढ़ाने वाले कौंच का व्यवसायिक उत्पादन तथा उसके लिए बाजार के इंतजाम में सरकार मदद करे, तो किसान इससे अच्छी आय ले सकते हैं। जंगल में दाकुली छेमी के नाम पहचान रखने वाली राजमा कुल के कौंच का अब सब्जी वाली प्रजाति विकसित हो चुकी है। म्यूकोना प्रूरिएंस वानस्पतिक नाम वाले कौंच की सब्जी वाली प्रजाति यहां बड़कोट, गणेशपुर, जामक, कामर, गंगोरी, सिरोर, स्यूणां आदि गांव में एक दो किसानों ने कौंच की कुछ फसल तैयार की है। कौंच की सब्जी का कारोबार करने वाले सब्जी विक्रेता मोहन प्रकाश व धन सिंह पंवार कहते हैं कि कुछ ही किसान घर में एक दो बेल लगाकर बाजार में बेच रहे हैं।
कोट.....
अभी वे गांवों में सतावर की खेती कराके किसानों से 50 हजार रुपये क्विंटल बीज खरीद रहे हैं। कौंच का परीक्षण करके इसकी खरीद तथा दाम तय करने पर निणर्य लिया जा सकता है।
जीवानंद पहाड़ी, प्रभारी, पंतजलि किसान सेवा समिति हरिद्वार।