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सैनिक मेले में हुई गढ़वाली कवि गोष्ठी

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उत्तरकाशी। सैनिक दीपावली मेले के तीसरे दिन लोकरंग की ओर से रामलीला मैदान के मंच पर गढ़वाली कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों ने पलायन, राजनीतिक, पर्यावरण विषयों पर काव्यपाठ किया।
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विश्वनाथ पूर्व सैनिक कल्याण समिति की ओर से आयोजित सैनिक दीपावली मेले में गढ़ कवियों ने काव्यपाठ किया। नागनाथ पोखरी चमोली से आए कवि दीवान ने व्यंग्यात्मक अंदाज में गंगा की दशा व इस नाम से सरकारी व गैरसरकारी संस्थानों के खुलते बाजार पर ‘गंगा अपवित्र न हो मेरा पाप धोंदि-धोंदि’ रचना को लोगों ने खूब सराह। ओम प्रकाश सेमवाल ने तौं क्रांति कारियों सणि जुदासता छुडैगैनी, नमन च तौं शहीदों सणि सु बलिवेदी मां चढ़िगैनी प्रस्तुत की। संदीप रावत ने बगत कुन बि हो दगड्या तू हिटदी जा रचना प्रस्तुत की। विक्रम कपर्वाण ने कांदी मां बंदुकी छन जिंदगी च हात मां की सुंदर प्रस्तुती दी। पौड़ी के मोहित नेगी ने इज्जत आई धार मां, अर बंठा बाजार मां कविता की प्रस्तुती दी। सुंदर नौटियाल जी ने ‘चैत बैशाख कु पहाड़’ से पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया। कवि सम्मेलन के अध्यक्ष व लोकरंग के संस्थापक लोकगायक ओम बधाणी ने लोकरंग की गतिविधियां बताई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मिथलेष झा, समिति के संरक्षक मेजर आरएस जमनाल, मुरारी लाल पोखरियाल, सुरेंद्र पुरी, मदन मोहन बिजल्वाण, राजेश जोशी, नवीन कठैत, शिवरतन सिंह रावत आदि मौजूद थे।
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