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भागीरथी में बढ़ते मलबे से गंगोत्री वासी परेशान

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गंगोत्री (उत्तरकाशी)। देव ऋषि व हमक्या गदेरों व गोमुख ग्लेशियर के चटकने से भागीरथी के कई किमी क्षेत्र में भूस्खलन तेज हो गया है, जिससे गंगा भागीरथी में जमा हो रहे मलबे ने गंगोत्री वासियों की नींद उड़ा दी है। ऐसे में न तो सरकार और न ही गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन के पास भूस्खलन के खतरे को टालने व बाढ़ प्रबंधन करने की कोई योजना है।
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जुलाई-अगस्त में कई बार गोमुख ग्लेशियर के चटकने तथा हमक्या व देव ऋषि गदेरों में ग्लेशियर आने से चट्टानी मलबा भागीरथी के दोनों छोरों पर जमा हो गया है। नदी तल ऊंचा उठने से रामबाग क्षेत्र में स्वामी वेदातांनंद, विश्वबंधु, बंगाली बाबा, बाबा रामदेव के योग गुरु स्वामी अपरोक्षानंद, डा. गिरीश, विष्णु गुफा, नवगृह मंदिर, हंस आश्रम, शिवानंद आश्रम की योग कुटीर आदि पक्की कुटिया व आश्रम बह गए थे। गंगोत्री में बनी करोड़ों की सुरक्षा दीवार के कई हिस्से भी इससे टूट गए थे। ऐसी स्थिति में अभी गंगोत्री के अपस्ट्रीम में जमा मलबे को चैनलाइज किए बगैर करोड़ों की नमामि गंगे घाट निर्माण की योजना सफल होने पर संदेह है।
गंगोत्री नेशनल पार्क के रेंज अधिकारी प्रताप पंवार स्वीकारते हैं कि गोमुख ट्रैक की बटिया तथा पुलिया आदि के लिए तो विभाग में बजट रहता है। देवऋषि गदेरे व हमक्या गदेरे में भागीरथी की ओर होने वाले भूस्खलन को रोकने के लिए कोई योजना नहीं बनी है। वहीं, गंगोत्री में घाट तथा सुरक्षा कार्य करा रहे सिंचाई विभाग के ईई पीएस पंवार कहते है कि नदी तल ऊंचा उठने व भूस्खलन के बड़े खतरे को टाल कर गंगोत्री को बचाने के लिए उच्चस्तर पर ही कोई बड़ी योजना बन सकती है। फिलहाल गंगोत्री की सुरक्षा के लिए इस बार तैयार दीवार ने काफी बचाव किया है। नमामि गंगे से घाट के लिए अभी तक बजट नहीं मिला है।
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