उत्तराखंड में वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने वाला संभाग परिवहन विभाग खुद खस्ताहाल है। प्रवर्तन कार्य में लगे ज्यादातर वाहन खटारा हालत में है। स्टाफ की कमी भी विभाग के काम में बाधा बनी है।
उत्तराखंड में जहां आबादी, दुपहिया और चौपहिया वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है, वहीं बेलगाम यातायात पर नकेल कसने वाला संभाग परिवहन विभाग स्टाफ और वाहनों की कमी से जूझ रहा है। विभाग खस्ताहाल वाहनों के भरोसे प्रवर्तन कार्य कर रहा है।
विभागीय अफसरों के अनुसार उनके यहां सिर्फ 65 प्रतिशत है। वाहनों की बात करे तो 18 प्रवर्तन दलों के पास सभी वाहन खटारा हालत में है। हालांकि मुख्यालय के अधिकारियों की सेवा में वहां के वाहन चकाचक है। विभागीय अफसर स्टाफ और गाड़ियों की कमी को दूर करने को लगातार विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग करते है, लेकिन बजट न होने का रोना रोकर उनकी मांग को दरकिनार कर दिया जाता है। जबकि यहीं अधिकारी हर वर्ष करोड़ों का राजस्व इकट्ठा करते है।
नहीं मिलता वसूली पर प्रोत्साहन
देश के दक्षिणी प्रांत कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र सहित कई प्रदेशों में प्रवर्तन विभाग की ओर से की गई वसूली में से विभाग 10 प्रतिशत राशि अपने अधिकारी कर्मचारियों को प्रोत्साहन के तौर पर देता है। जबकि नार्थ के प्रदेशों में ऐसा नहीं होता। अफसरों का कहना है कि यहां भी ऐसा प्रावधान होना चाहिए।
देहरादून संभाग के लिए नई गाड़िया खरीदने को मैंने पहल की थी। मुख्यालय से कुछ पैसा मिला है। विभाग में कर्मचारियों की कमी बनी हुई है, कर्मचारियों की कमी दूर करने को भी मुख्यालय को लिखा गया है। कर्मियों की कमी के बाद भी जुर्माना वसूली में हमारी टीमें अव्वल रही हैं। लक्ष्य से अधिक पैसा सरकार के खाते में जमा किया गया है।
- सुधांशु गर्ग, आरटीओ, देहरादून संभाग