उत्तराखंड की त्रासदी से देश आहत, गम और गुस्से में है।
इस त्रासदी ने देश को कभी न भूलने वाला एक गहरा जख्म दिया है। मगर जितना जख्म कुदरत के कहर ने दिया है, उससे कहीं ज्यादा सियासत के दुकानदारों ने।
हादसे के पीड़ित हजारों लोग और उनके परिजन जिंदगी की दुआ मांग रहे हैं तो इधर देश के सियासतदान इस दुख के दरिया में भी डुबकी लगाकर वोट के मोती चुनने का एक भी मौका नहीं गंवा रहे।
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पूरे दृश्य से अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान बचाने वाले बहादुर जवान गायब हैं। इनकी जगह ले ली है सियासत के दुकानदारों ने।
राज्य में चेहरा दिखाने की होड़ मची है। कोई महज देहरादून पहुंचकर 15 हजार लोगों को बचाने का दावा कर रहा है तो कई चेहरे वहां इसलिए भी पहुंच गए कि कहीं उन्हें संवेदनहीन न मान लिया जाए। भाजपा और कांग्रेस दोनों के बीच लोगों की जिंदगी की कीमत पर सियासत का खेल जारी है।
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हादसे के शुरुआती दो दिनों तक पीड़ितों के लिए सियासतदानों में संजीदगी दूर दूर तक नहीं दिख रही थी। मीडिया रिपोर्टों में जब इस त्रासदी की व्यापक तस्वीर बार-बार खींची गई तो देश के सियासतदान अचानक सक्रिय हो गए।
सबसे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हवाई सर्वेक्षण कर सरकार के सक्रिय होने का संदेश दिया।
मगर इसके बाद भाजपा का नया चेहरा बनाए गए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से सियासी हलचल मच गई। मोदी ने एक दिन के दौरे में बड़ी सियासी पारी खेलने की ललक साफ दिखी।
उन्होंने राहत के लिए दो करोड़ देने की घोषणा और केदारनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी मांग इस जंग को तेज कर दिया। उनके समर्थकों ने एक ही दिन में 15 हजार गुजराती तीर्थयात्रियों को बचाने का दावा किया।
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हद तो यह हो गई कि देहरादून की उस हवाई पट्टी पर बोइंग विमान उतारने का भी दावा किया गया, जहां छोटे विमान के उतारने की ही क्षमता है।
इस दौरान मोदी ने 24 हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव रखा। मगर कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को बिना उचित कारण बताए खारिज कर दिया।
दरअसल मोदी यह दिखाना चाहते थे कि गुजरात कितना सक्षम है, जबकि कांग्रेस नहीं चाहती थी कि इस मामले में मोदी को बढ़त मिले।
मोदी के दौरे के बाद सियासतदानों में अपना अपना चेहरा दिखाने की होड़ सी मच गई। महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा के मुख्यमंत्री आनन फानन वहां पहुंचे और अपने अपने राज्यों के तीर्थयात्रियों को निकालने का दावा किया।
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर भेज अपने राज्यों के लोगों को निकालने का दावा किया।
कांग्रेस ने जब मोदी के वहां जाने पर सवाल उठाए तो भाजपा ने पलटवार करते हुए पूछा कि इस भयानक आपदा के दौरान राहुल गांधी कहां हैं। जवाब में कांग्रेस लगातार व्यक्ति की उपस्थिति दर्ज कराने के बदले राहत ऑपरेशन को जरूरी बताती रही।
मगर इस बीच तमाम मनाही के बावजूद पार्टी के दिग्गज नेता देहरादून और ऋषिकेश का भ्रमण करते रहे। हद तो तब हो गई जब विपक्षी हमले से घबराई कांग्रेस ने आठ दिन बाद अचानक राहुल को न केवल पेश किया, बल्कि सियासी जंग में पीछे होने के डर से विदेश से लौटे राहुल को आनन फानन उत्तराखंड भी रवाना कर दिया।
सियासतदानों के हवाई सफर से आपदा राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। राहत कार्यों में मुस्तैदी से डटे सेना, अर्द्धसैनिक बलों के जवानों के लिए विशिष्ट लोगों का दौरा परेशानी का सबब है।
मगर चूंकि श्रेय लूटने की होड़ है, इसलिए सियासतदानों को न तो किसी की जिंदगी की फिक्र है और न ही राहत कार्यों में जुटे जवानों की परेशानी की।