केदारनाथ त्रासदी से उन लोगों का सबसे बुरा हाल है, जिनके परिजन चारधाम यात्रा पर गए थे और उनका कुछ अता-पता नहीं है।
तीर्थनगरी के संयुक्त रोडवेज यात्रा बस अड्डे में दिल्ली, यूपी, मध्यप्रदेश, हरियाणा से तमाम लोग प्रकृति के विध्वंस के बाद लापता अपनों की फोटो लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं।
कोई अपनी बहन के सुहाग तो कोई अपने सुहाग को तलाश रहा है।
स्थिति यह कि पहाड़ से आने वाले हर वाहन की ओर लोग दौड़े चले जा रहे हैं, इस उम्मीद में कि शायद इसमें उनका अपना कोई हो। यात्रियों को फोटो दिखाकर पूछ रहे हैं इन्हें कहीं देखा है।
अशोक मीणा निवासी जोधपुर, राजस्थान छह दिन से रोडवेज बस अड्डे में लगे राहत शिविर कैंपों और परिसर में अपने दादा किशोरी लाल मीणा (70) और दादी कल्याणी देवी (60) की खैर खबर लेने के लिए भटक रहे हैं।
अशोक बताते हैं कि केदारनाथ के दर्शन को गए दादा से 18 जून को बात हुई थी, उसके बाद से मोबाइल बंद है। प्रशासन की ओर से कोई जानकारी नहीं मिल रही है।
कुछ यही हाल भजनपुरा दिल्ली के एके पांडेय का है, उनका 11 वर्षीय बेटा और पत्नी पूनम 39 रिश्तेदारों के साथ नौ जून चारधाम यात्रा पर गए थे, मगर उनका कुछ पता नहीं है।
बेटे और पत्नी की चिंता में पांडेय छह दिनों से रोडवेज अड्डे पर डेरा डाले हैं। घूम घूमकर पैर सूज गए हैं, लेकिन अपनों की कोई जानकारी नहीं मिली कि किस हाल में हैं, कहां हैं।
ऐसे तमाम लोग हैं जो अपनों की तलाश में भटक रहे हैं।
नवी मुंबई, महाराष्ट्र निवासी दर्शन के पति कुमार विक्रम पुरबे (34), ससुर रामकुमार (62) और सास पूनम (54) भी तीर्थयात्रा पर गए थे।
(15) जून की रात पति ने बताया था कि वह सही सलामत हैं, लेकिन उसके बाद कोई संपर्क नहीं हुआ।
अकेली दर्शन परिजनों की फोटो लेकर बस अड्डा परिसर में चार दिन से भूखी प्यासी घूम रही है। पहाड़ से आने वाले यात्रियों को फोटो दिखाकर पूछ रही है, इन्हें कहीं देखा है।