ऊपर से आदेश हैं कि कोई भी मंत्री आपदा के समय चॉपर में नहीं घूमेगा, लेकिन प्रदेश के मंत्री जी हैं कि वह आपदा के दौरान फ्री में घुमने का मौका ज्यादा उठा रहे हैं।
हर रोज कई उड़ान उन्हें ले जाने और वापस लाने में बेकार हो जा रही है। इसका अपनों को ढूंढने आए पीड़ित विरोध कर हंगामा भी कर रहे हैं। आईए बताते हैं आपको ऐसे 4 मामले।
केस एक
दोपहर 1 बजे सहस्रधारा हैलीपैड पर चॉपर लैंड हुआ। यहां अपनों की तलाश में उपस्थित दर्जनों पीड़ित चॉपर के पास पहुंच गए। सभी यहां अपनों के उतरने की आस लगाए थे।
लेकिन इसमें से उतरे सफेद बिना दाग लगा कुर्ता पजामा पहने कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल और प्रीतम सिंह। दोनों धीरे से बाहर निकले और लोगों का विरोध देखते हुए वहां से चले गए।
जबकि इस चॉपर में उनके साथ अन्य पीड़ित भी बैठकर आ सकते थे। दुर्गापाल उत्तरकाशी जिले को देख रहे थे।
केस दो
दोपहर बाद लोगों की लंबी आस के बाद एक चॉपर उतरा। इससे कुछ देर तक कोई उतरकर बाहर नहीं आया है। जब लोगों की भीड़ दूर चली गई तो कैबिनेट मंत्री हरक सिंह इसमें से उतरे और लोगों के बीच पहुंच गए।
अपनों को ढूंढने वाले गुस्साए लोगों के परिजनों ने इन्हें घेरकर विरोध किया। लोगों ने यहां तक कहा कि यह कैसी सरकार है। पीड़ित कम चॉपरों से मंत्री ज्यादा उतर रहे हैं। विरोध में घेराव होते देख कुछ देर बाद हरक सिंह रावत भी यहां खिसक गए।
केस तीन
तीन बजे एक चॉपर हेलीपेड के हैंगर के ठीक बाहर उतरा। इसमें से चमचमाते चेहरा लिए विधायक सुबोध उनियाल उतरे।
पूछताछ में बताया कि श्रीनगर से आए सुबोध उनियाल को स्पेशल तौर से दून से एक चॉपर खाली गया था। जिनमें ये अकेले वहां से आए। जबकि आपदा क्षेत्र में जाता तो कई पीड़ित दून आ सकते थे।
केस 4
मंगलवार को केंद्र से आए आपदा प्रभारी बीके दुग्गल भी एक चॉपर लेकर प्रभावित क्षेत्र की सैर पर निकल गए।
दो घंटे बाद लौटकर बताया कि चिन्याड़ी सेल में रास्ता खराब हो गया है। इससे पैदल लोग नहीं निकल पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सभी लोगों को सेना के कैंप में अच्छी तरह से खाना दिया जा रहा है। ये भी यहां से खिसक चले गए।
विरोध में उतरे लोग
मेरे मम्मी पापा चार धाम यात्रा के दौरान आई तबाही में फंस गए हैं। 6 दिन से मैं दून और जौलीग्रांट में उनके मिलने की आस में चक्कर काट रहा हूं।
लेकिन यहां तो आधे से ज्यादा चॉपरों से वीआईपी उतर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार के आदेश हैं कि कोई वीआईपी चॉपर से नहीं उड़ेगा।
तेजस अग्रवाल, अहमदाबाद
हर पीड़ित अपनों के आने की राह चॉपर में देख रहा है। लेकिन उससे चमचमाते कपड़े पहने उतर रहे वीआईपी हमारे दिल को झटका रहे हैं। आपदा के समय केवल पीड़ित ही चॉपर से लाए जाने चाहिए।
सेमुअल, दिल्ली
मेरे परिवार से केंदारनाथ गए 16 लोगों का कुछ पता नहीं है। कई दिन से पहले जैलीग्रांट और अब यहां उनके मिलने की आस लगाए चॉपर देख रहा हूं।
लेकिन इनमें उतर रहे वीवीआईपी जब उतरते हैं तो दिल से गुस्से के साथ टीस निकलती है।
राजेंद्र साह, महाराष्ट्र