उत्तराखंड की आपदा को एक माह पूरा होने के साथ ही इसमें लापता लोगों को तलाशने की डेडलाइन सोमवार को खत्म हो गई। लेकिन राज्य और केंद्र सरकार ने लापता लोगों को फिलहाल मृत मानने से इंकार कर दिया है।
राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने साफ किया कि लापता 5748 लोगों को मृत घोषित नहीं किया जाएगा और उनकी तलाश जारी रहेगी।
मंगलवार से राज्य सरकार आपदा में मृत और लापता लोगों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने का काम शुरू करेगी। केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला के साथ सोमवार को मीडिया से रू-ब-रू मुख्यमंत्री ने बताया कि आपदा में उत्तराखंड के 924 लोग लापता हैं।
इनके परिजनों को प्रदेश सरकार की ओर से पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक मंगलवार से देना शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि परिजनों से एक शपथपत्र भरवाया जाएगा। लापता व्यक्ति के मिल जाने पर सहायता राशि वापस करनी होगी। पिछले सप्ताह बहुगुणा ने डेडलाइन तय करते हुए कहा था कि यदि लापता लोगों के बारे में 15 जुलाई तक कुछ पता नहीं चलता है तो उन्हें मृत मान लिया जाएगा।
गौरतलब है कि 16 जून को बाढ़ और बारिश ने उत्तराखंड में भारी कहर बरपाया था।
अन्य राज्यों के लोगों को मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों के लापता लोगों के परिजनों को प्रधानमंत्री की ओर से घोषित दो लाख और राष्ट्रीय आपदा राहत फंड (एनसीआरएफ) से डेढ़ लाख रुपये मिलेंगे। इसके अलावा संबंधित राज्य सरकारें अपनी तरफ से जो चाहे मदद कर सकती हैं।
दूसरे राज्यों की घोषणा के बाद यदि कोई मदद मांगता है, तब विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि अन्य राज्यों के 4824 लापता लोगों की सूची अब तक उत्तराखंड सरकार के पास है।
यह आंकड़ा अब भी घट-बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आपदा में मरने वालों की संख्या 580 है। हालांकि इनमें से 196 के शव ही अब तक मिल पाए हैं। वहीं, राजीव शुक्ला ने कहा कि उत्तराखंड को केंद्र से हर संभव मदद का प्रयास किया जाएगा।
कागजों में जिंदा रहेंगे लापता
आपदा में लापता लोगों के अब जीवित होने की संभावना भले ही कम मानी जा रही हो, लेकिन वे न्यायिक व पुलिस रिकार्ड में सात साल तक जिंदा रहेंगे।
गुमशुदगी के आपदा से जुड़े जितने मामले दर्ज हैं, उनकी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही विवेचना होगी और निश्चित अवधि के भीतर जांच कर फाइनल रिपोर्ट अदालत में जमा करनी होगी। अदालत ही अंतिम निर्णय लेगी।
खास बात यह है कि लापता लोगों में ऐसे भी काफी लोग होंगे जो आपराधिक या सिविल मुकदमों में वादी या प्रतिवादी होंगे। इसका निस्तारण भी सात साल बाद ही होगा।
इस बीच अगर किसी शव की बरामदगी के बाद उसकी शिनाख्त हो जाती है तो पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अदालत उसे पहले भी मृत घोषित कर सकती है।
केदारनाथ में रोपवे पर भी विचार
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि 30 सितंबर के बाद बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शुरू करवाई जाएगी। सड़कों को ठीक करने का काम तेज कर दिया गया है। केदारनाथ पहुंचने का अभी कोई रास्ता नहीं है।
वैकल्पिक मार्ग की संभावना तलाशी जा रही है। वहां रोपवे लगाने पर भी विचार हो रहा है। केदारनाथ में मलबे को हटाने के लिए मौसम खुलते ही मशीनें पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
मलबा हटाने से पहले भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की राय ली जाएगी। ताकि वहां आगे कोई अन्य नुकसान न हो।
240 गांवों के पुनर्वास का प्रस्ताव
खतरे की जद में आए लगभग 240 गांवों के पुनर्निर्माण और पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। पहाड़ के लोगों को मैदानी इलाकों में पुनर्वासित नहीं किया जाएगा। पहाड़
में ही उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। भूकंपरोधी तकनीक से भवन तैयार किए जाएंगे। सरकार एक मॉडल विलेज तैयार करेगी। उसी मॉडल पर अन्य गांवों के पुनर्वास में गैरसरकारी संस्थाओं की मदद ली जाएगी।
प्रधानों से ली जाएगी ग्राउंड रिपोर्ट
मुख्यमंत्री ने बताया कि बीएसएनएल ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार सेवा दुरुस्त कर ली है, जिसके जरिए मंगलवार से सभी ग्राम प्रधानों से फोन पर बात कर जमीनी स्तर (ग्राउंड लेवल) पर राहत सामग्री की स्थिति का ब्योरा जुटाया जाएगा।