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आपदा ने लापतागंज को भी हिला दिया...

Fri, 05 Jul 2013 06:17 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
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कभी बहेलिए के बाण से बिद्ध नर क्रौंच पक्षी की मादा के विलाप से विकल होकर आदि कवि वाल्मीकि ने पहली कविता रची थी। इसे दूसरों की पीड़ा में विकलता कहें, सामाजिक उत्तरदायित्व अथवा व्यावसायिकता का तकाजा, मौजूदा वक्त में हिंदी के टीवी सीरियलों में उत्तराखंड की आपदा छाई हुई है।
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टीवी सीरियलों में कहीं श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन हो रहा है तो कहीं कलाकार उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों के लिए मदद की अपील करते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कई कलाकार तो संस्थाओं के माध्यम से उत्तराखंड में तबाह हुए ग्रामीणों के पुर्नवास के लिए चैरिटी भी इकठ्ठा कर रहे हैं।

लापता गंज में हुई सभा
सबटीवी के लोकप्रिय धारावाहिक ‘लापतागंज’ के कलाकारों में शो में बाकायदा उत्तराखंड के आपदा के मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर जताया कि वे पीड़ा की घड़ी में उत्तराखंडियों के साथ हैं। इसी चैनल पर आने वाले सीरियल ‘तारक मेहता का उलटा चश्मा’ में मशहूर कवि और एंकर आपदा पीड़ितों की मदद की अपील करते नजर आते हैं।
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स्टार प्लस के सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ एवम ‘दीया और बाती’ के कलाकार भी सीरियल में न सिर्फ उत्तराखंड की आपदा केप्रति न सिर्फ चिंतित नजर आते हैं बल्कि ऐलान भी करते हैं कि इस पीड़ित प्रदेश में मदद भेजनी है। स्टार प्लस के ही ‘साथिया साथ निभाना’ और जी टीवी पर आ रहे सीरियल ‘सपने सुहाने लड़कपन के’ में भी उत्तराखंड की आपदा पर चिंता जताई गई है।

टीवी सीरियलों में ब्रेक के दौरान कई ऐसी संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों के विज्ञापन भी प्रसारित किए जाने लगे हैं जो उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों की मदद में आगे आए हैं।
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