‘मैं हर साल अमरनाथ यात्रा पर जाता हूं, लेकिन विषम परिस्थितियों की वजह से कभी बच्चों को साथ नहीं ले गया। पत्नी मुझे यह बताकर गई थी कि हरिद्वार जा रही हूं, लेकिन वहां जाकर केदारनाथ दर्शन का कार्यक्रम बन गया। उन्होंने फोन पर दर्शन की बात बताई तो मुझे इस बारे में मालूम चला। तब से लेकर आज तक उनका कुछ पता नहीं है।
अगर मुझे पता होता तो मैं उन्हें बच्चों के साथ कभी वहां न जाने देता’। लखनऊ निवासी राजेश कुमार पांडे को आज भी पत्नी और दो बेटियों के लौट आने की उम्मीद है। इसी उम्मीद में वह दर दर भटक रहे हैं।
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रेलवे में वरिष्ठ खंड अभियंता, विद्युत राजेश पांडे ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी आयुषी ने इसी साल 85 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं की परीक्षा पास की है, जबकि छोटी बेटी कलश सातवीं में आई थी। दोनों आनंदनगर स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल में पढ़ती थीं। गर्मियों की छुट्टियों में पत्नी रीना पांडे के साथ दोनों बेटियां अपने मामा के घर फैजाबाद गई थीं।
वहीं से हरिद्वार व ऋषिकेश का कार्यक्रम बना। राजेश के ससुराल से 15 लोगों का दल 13 जून को हरिद्वार पहुंचा। यहां से यह लोग केदारनाथ और बद्रीनाथ दर्शन के लिए निकल पड़े। 15 जून की शाम को सभी केदारनाथ मंदिर पहुंचे और 16 जून को रीना के मोबाइल (9415520745) से साले संतोष पाठक ने राजेश को फोन किया था।
आज तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया
उन्होंने बताया था कि केदारनाथ में तेज बारिश हो रही है और वह फिलहाल सुरक्षित जगह पर रुके हुए हैं। तब से लेकर आज तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इस दल में शामिल रहे संतोष पाठक, शांति देवी, सुषमा पाठक, मयंक पाठक, आकृति पाठक, रीना पांडे, आयुषी पांडे, कलश पांडे, राजकिशोर गुप्ता, प्रतिभा गुप्ता, अमूल्या गुप्ता(खुशी), वृंदा देवी, संतोष जायसवाल, रेनू जायसवाल और निर्मला देवी में से किसी की भी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। गाड़ी का ड्राइवर उदयभान सिंह भी मिसिंग है।